19/9/17

बुद्धिमान मछलियाँ और डरपोक मेंढक

आधी रात के समय एक तालाब में सभी जीव शांति से सो रहे थे, लेकिन एकबुद्धि नाम का एक मेंढक बहुत ही बेचैन था। उसकी बेचैनी का कारण शाम की वह घटना थी जिसकी वजह से उसे आज रात ही यह तालाब छोड़ कर किसी दूसरे तालाब में जाना पड़ सकता था। हालांकि उसके दो बहुत ही ख़ास मित्रों ने उसे तालाब न छोड़ कर जाने की सलाह दी थी।

उसके ये दो मित्र शतबुद्धि और सहस्त्रबुद्धि नाम की दो बड़ी मछलियाँ थे। अपने नाम की ही तरह शतबुद्धि अगर बुद्धिमान था तो सहस्त्रबुद्धि अति बुद्धिमान। एकबुद्धि की दोस्ती जब से इन दोनों से हुई थी तब से ही उसका समय बहुत अच्छा बीत रहा था। शतबुद्धि और सहस्त्रबुद्धि उसे तमाम ज्ञानवर्धक बातें बताते तथा अपनी तरह-तरह की कलाबाजियों तथा करतबों से उसका खूब मनोरंजन करते।

आज शाम को भी एकबुद्धि अपने इन्ही दोनों मित्रों के साथ तालाब के किनारे हँसी-ठिठोली कर रहा था। तभी अपने सर पर मछलियाँ और कंधों पर जाल लादे कुछ मछुआरे तालाब के पास आए और तालाब को बड़े गौर से देखने लगे। कुछ देर तालाब का मुआयना करने के बाद उनमें से एक मछुआरे ने कहा “इस तालाब में बहुत सी मछलियाँ हैं और पानी कम है इसलिए कल सुबह हम सब आयेंगे।“ बस इतना कह कर वे सब चले गए।

मछुआरों की ऐसी बातें सुनकर तीनो मित्र आपस में विचार करने लगे। एकबुद्धि ने कहा “तुम दोनों ने मछुआरों की बात सुनी? अब हमें क्या करना चाहिए? यहाँ रुकना चाहिए या यहाँ से भाग जाना चाहिए?”

यह सुनकर सहस्त्रबुद्धि ने कहा अरे! डरो मत, भला किसी की बात सुनकर भी कोई डरता है। शास्त्रों में कहा है पापियों का कभी भला नहीं होता इसीलिए दुनिया चलती है वरना ये दुनिया कब की ख़त्म हो गयी होती। पहली बात तो ये है कि वे यहाँ आयेंगे नहीं और अगर आ भी गए तो मैं अपनी चालाकी से सबको बचा लूँगा। क्योंकि मैं पानी में तरह-तरह से तैरना और दुश्मन को गच्चा देना जानता हूँ’।

सहस्त्रबुद्धि की ऐसी बातें सुनकर शतबुद्धि बहुत खुश हुआ और बोला, इस दुनिया में एक चतुर के लिए कोई भी चीज असंभव नहीं है। क्योंकि आचार्य चाणक्य ने तो अपनी बुद्धि से ही तलवारधारी नंद वंश के शाशकों का अंत किया था। इसलिए केवल किसी की बात सुनकर ही अपने पुरखों का घर नहीं छोड़ा जा सकता। शास्त्रों में भी कहा है
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।

अर्थात् माता और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान हैं। अरे अपना जन्मस्थान कितना भी खराब हो पर वहाँ जो सुख मिलता है, वह स्वर्ग में भी नहीं मिल सकता।

दोनों की बातें सुनकर एकबुद्धि ने कहा मैं आप दोनों जैसा बुद्धिमान तो नहीं, पर जितना मैं समझता हूँ, इस तालाब को छोड़ देने में ही भलाई है। क्योंकि…

इससे पहले कि एकबुद्धि अपनी बात के पक्ष में कोई तर्क देता शतबुद्धि का पारा चढ़ गया। तुम तो जानते हो कि हम कितने बुद्धिमान हैं। हाँ तुम्हारी बात अलग है, हम ये तो जानते थे कि तुम्हारी बुद्धि कम है पर हमने सोचा भी नहीं था कि तुम इतने डरपोक भी निकलोगे। हम तो यह तालाब छोड़कर जाने वाले नहीं तुम अपना सोच लो, अगर जाना चाहते तो जाओ जल्दी निकलो नहीं तो मछुआरे आ जायेंगे। इतना बोलकर दोनों जोर-जोर से हँसने लगे।

अपने से अधिक बुद्धिमान मित्रों के सामने स्वयं को मूर्ख और डरपोक साबित होते देख एकबुद्धि ने भी उनकी हाँ में हाँ मिला दी। अरे मैं तो बस आप लोगों की राय ले रहा था। मैं भला इतनी सी बात से क्यों डरने लगा। भला अपने इस प्यारे तालाब को छोड़कर मैं क्यों किसी दूसरे तालाब में जाने लगा?

अपने मित्रों के सामने भले ही एकबुद्धि अपने तालाब को न छोड़कर जाने की बात कहकर आया था। लेकिन जैसे-जैसे रात गहराती जा रही थी उसकी चिंता और डर दोनों ही बढ़ते जा रहे थे। अगर मछुआरों ने कहा है कि वे कल सुबह आयेंगे तो उन्होंने ऐसा क्यों कहा होगा? क्या वे किसी और काम से भी इस तालाब में आ सकते हैं? अगर उन्होंने जाल फेका तो क्या मैं बच पाऊंगा? अगर एक बार बच भी गया तो क्या मैं बार-बार बच पाऊंगा?

एकबुद्धि बहुत प्रयास करने पर भी अपने मित्रों की बातों पर भरोसा नहीं कर पा रहा था।

अगले दिन दोपहर का समय था। एकबुद्धि एक नए तालाब में था जहाँ वह कल रात में ही आया था। यहाँ उसके पुराने तालाब की तरह न कोई मित्र थे और न ही कोई जान पहचान वाला। सुबह से ही एकबुद्धि यहाँ नए-नए लोगों से जान पहचान बनाने में लगा था। लोग उससे बात कर लेते, उसकी व्यथा सुन लेते और फिर सांत्वना देकर अपने काम में लग जाते। पुराने तालाब की तरह यहाँ कुछ भी नहीं था। न शतबुद्धि और शहस्त्रबुद्धि जैसे मित्र थे न ही अन्य जान पहचान वाले।

पुराने तालाब का कोना-कोना वह जानता था पर यहाँ तो हर जगह नयी थी। जहां भी वह डेरा जमाने की कोशिश करता कोई न कोई उस जगह को अपना बता कर उसे वहाँ से हटा देता। अंततः तालाब के बाहर उसे एक शांत स्थान मिला जहाँ रुक कर वह सोचने लगा।

अभी तक तो इधर से कोई मछुआरे जाते दिखाई नहीं दिए। लगता है वो नहीं आए और मैं भय से झूठ में ही अपने तालाब और अपने मित्रों को छोड़कर भाग आया। वे लोग मेरी मूर्खता पर हँस रहे होंगे। अब मैं क्या मुह लेकर उनके सामने जाऊँगा। तभी उसे कल वाले वही मछुआरे दिखाई पड़े जो पुराने तालाब की ओर से ही आ रहे थे। उन्होंने ढेर सारे मछलियाँ मेंढक, केकड़े और अन्य जीव लादे हुए थे। दो मछलियाँ तो इतनी बड़ी थीं कि उनको बाँधकर उन्होंने अपने कंधे पर लटकाया हुआ था।

एकबुद्धि ने उन दोनों बड़ी मछलियों को पहचान लिया था, वे शतबुद्धि और सहस्त्रबुद्धि थे। ये तो प्रत्यक्ष था की उन दक्ष मछुआरों के सामने शतबुद्धि और सहस्त्रबुद्धि की कोई बुद्धि नहीं चली थी।

उनकी ऐसी दशा देखकर एकबुद्धि को बहुत दुख हुआ। लेकिन अब कल शाम से ही जो चिंता और भय का बोझ था वो उतर गया। उसे अपनी बुद्धि पर भरोसा हो गया था क्योंकि आज सुबह से ही जो मूर्खता और शर्म का भाव था वो आत्मसम्मान और आत्मविश्वास में बदल गया।

उसे अब लगने लगा था कि नए तालाब के लोगों से जल्दी ही उसकी मित्रता हो जायेगी। और वो आराम से यहाँ रह पायेगा। क्योंकि अपने पुराने तालाब को छोड़ कर भागने की जो मूर्खतापूर्ण और दुखभरी कहानी वह यहाँ के लोगों को सुना रहा था वो अब बुद्धिमत्तापूर्ण और सुखद हो चुकी थी।

अब अपनी इस पूरी कहानी को वो इन लोगों को जल्दी से जल्दी सुनाना चाहता था, इसलिए उसने तालाब के पानी में छलांग लगा दी।

तो दोस्तों इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

1. अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग स्किल्स काम आती हैं। मछलियों की जो बुद्धि और तैरने की कला तालाब के जीवों को इम्प्रेस करती थी वो मछुआरों के सामने काम नहीं आयी। इसलिए हमें अपनी स्किल्स और डिग्रियों का घमण्ड नहीं करना चाहिए। और लगातार ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करते रहना चाहिए।

2. कोई कितना भी बुद्धिमान क्यों न हो वह अक्सर परिवर्तन का विरोध करता है और इसके लिए तरह-तरह के तर्क और बहाने ढूंढ लेता है। क्योंकि वह अपने कम्फर्ट जोन में रहना चाहता है। जैसे शतबुद्धि और सहस्त्रबुद्धि ने तालाब न छोड़ कर जाने के कई तर्क ढूंढ लिए।

3. कुछ खतरे ऐसे होते हैं जिनसे बचने के लिए आपको मूर्ख और डरपोक साबित होने से भी परहेज नहीं करना चाहिए। स्पेशिअली जहाँ जान जाने का खतरा हो। आजकल लोग अपने आपको बहादुर साबित करने के लिए तरह-तरह के स्टंट करते हैं, खतरनाक जगहों पर सेल्फी लेते हैं, और ब्लू-व्हेल जैसे खतरनाक खेलों में शामिल होते हैं जिसकी उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ती है।

इसी प्रकार बहुत से छात्र कक्षा में कुछ समझ में न आने पर शिक्षक से पूछने से डरते हैं कि कहीं उन्हें लोग मूर्ख न समझ लें। ऐसे लोगों की असली मूर्खता तो परीक्षा परिणाम आने पर ही साबित होती है।


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3/10/16

घमंडी शेर और नन्हा खरगोश ज्ञानवर्धक कहानी

घने जंगल में एक नन्हा खरगोश भारी क़दमों से चला जा रहा था।

उस घने जंगल में दूर गुस्से में किसी शेर की दहाड़ सुनाई दे रही थी। उसकी दहाड़ इतनी भयावह थी कि जंगल में रहने वाले पशु पक्षी डरकर काँपने लगते।

ऐसे में भी नन्हा खरगोश शेर की दहाड़ की दिशा में चला जा रहा था। जब भी गुस्सैल शेर की दहाड़ सुनाई देती वह नन्हा खरगोश काँप उठता था।

उस गुस्सैल शेर के पास जाने का केवल एक ही परिणाम हो सकता था। मौत! पर आज वह खरगोश जान बूझ कर मौत के मुह में जा रहा था। आज उसे अपने जीवन का बलिदान देना था, अपने परिवार के लिए, अपने समाज के लिए और उस समझौते के लिए जो न हुआ होता तो शायद वो और उसके जैसे कई अन्य जानवर आज जीवित न होते। उस समझौते के लिए जो जंगल के जानवरों ने उस दुष्ट, गुस्सैल और घमंडी शेर से किया था।

उसे आज भी उस दुष्ट शेर की करतूतें याद थीं। कैसे वह कई-कई जानवरों का शिकार बिना वजह किया करता था। कुछ को खाता और कुछ को ऐसे ही मार कर छोड़ देता था।

शेर मांसाहारी होता है और अपनी भूख मिटाने के लिए जानवरों का शिकार कर और उन्हें खाकर अपना पेट भरता है। पर इस दुष्ट शेर को अपनी ताकत और जंगल का राजा होने का इतना अधिक घमण्ड हो गया था कि वह अपना पेट भरा होने पर भी निरीह जानवरों का शिकार किया करता था।

उस घमंडी शेर के अत्याचारों से तंग आकर जंगल के सभी जानवर उसके पास गए और तभी यह सामझौता हुआ कि रोज एक अलग प्रजाति का जानवर शेर के पास भेजा जाएगा जिसको खाकर शेर अपना पेट भरेगा और किसी अन्य जानवर की हत्या नहीं करेगा। पर शेर ने एक शर्त ये भी रखी कि यदि ऐसा न हुआ तो शेर जंगल के सभी जानवरों को मार डालेगा।

इस प्रकार बेवजह की हत्या से बचने के लिए रोज अलग-अलग प्रजाति के जानवर शेर के पास जाने लगे। और आज नन्हे खरगोश की बारी थी।

नन्हा खरगोश भले ही शेर के सामने शक्ति में कुछ नहीं था पर वह बहुत बुध्दिमान था। और आज पूरे रस्ते वह उस दुष्ट शेर से बचने के उपाय सोचता हुआ जा रहा था। उस शेर से निपटने के उपाय ढूँढते-ढूँढते उसे थोड़ी देर हो गयी। पर यह अच्छा ही था। क्योंकि उसने जो उपाय सोचा था उसके लिए शेर का गुस्सा होना आवश्यक था।

अंततः खरगोश शेर के पास पहुँचा और उसके सामने कुछ दूरी पर हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। पहले से ही गुस्साए शेर ने जब अपने भोजन के रूप में नन्हे से खरगोश को देखा तो वो और भी अधिक गुस्सा हो गया।

शेर बड़े जोर से दहाड़ा और बोला “जंगल के जानवरों ने इतनी देर से वो भी एक नन्हे से खरगोश को भेजकर अच्छा नहीं किया। अब मैं सबको मार डालूँगा।“

शेर की ऐसी धमकी सुन कर नन्हा खरगोश बोला “आपके लिए हम पाँच खरगोश चले थे लेकिन रास्ते में एक दुष्ट ने अन्य चार को खा लिया। मैं किसी तरह बचकर छिपते-छिपाते यहाँ तक आया हूँ।“

“तो तुम लोगों ने उसे बताया क्यों नहीं कि तुम लोग मेरे पास आ रहे हो?” शेर ने कहा।

बताया था महाराज लेकिन वो जंगल में नया आया लगता है। उसने हमारी एक न सुनी और कहा कि शेर कौन है उसे तो मैं बाद में देखूंगा पर आज से इस जंगल का राजा मैं हूँ और मैं जो चाहूँगा वही होगा।

इसपर शेर गुस्से से आग बबूला हो गया और बोला वो कहाँ मिला था मुझे बता मैं अभी उसका अंत करता हूँ।

खरगोश ने कहा “वो एक बिल में रहता है अगर आप कहें तो मैं आपको वहाँ ले चलूँ?”

इस प्रकार खरगोश शेर को एक कुएं के पास ले गया और बोला महाराज वो दुष्ट इसी बिल में रहता है। मुझे तो डर लग रहा है आप ही बात कर लीजिये।

शेर कुएं के पास गया और उसमे झांक कर देखा तो उसे कुएं के पानी में अपनी ही परछाईं दिखाई दी। अपनी परछाईं को दुश्मन समझ कर शेर जोर से दहाड़ा। इसपर कुएं में उसकी दहाड़ गूँज गयी और दुश्मन की दहाड़ के रूप में उसे वापस सुनाई दी। शेर ने सोचा ये दुश्मन तो अपने बिल से मुझे ललकार रहा है मैं इसे अभी ख़त्म करता हूँ। ऐसा सोचकर शेर ने कुएं में छलांग लगा दी।

पर ये क्या यहाँ तो कोई दुश्मन नहीं था, था तो सिर्फ पानी। अपनी ताकत के नशे में चूर दुष्ट शेर अब एक ऐसी जगह फंस गया था, जहाँ से निकलना उसके बस की बात नहीं थी। अब उसे इसी कुएं का पानी पी-पी कर मरना था।

इस प्रकार बुध्दिमान खरगोश ने दुष्ट शेर से जंगल के जानवरों को छुटकारा दिलाया।

मित्रों इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है

1. जो काम बल से नहीं हो सकता वो बुद्धि से किया जा सकता है। इसलिए हमें अपनी सफलता के लिए बल और बुद्धि दोनों का प्रयोग करना चाहिए। जिस प्रकार नन्हा खरगोश स्वयं के कमजोर होने पर अपनी बुद्धि से शेर को मारने में सफल हो गया।

2. हमें अपने कार्य सिद्ध करने के लिए नए नए उपाय सोचते रहना चाहिए, जैसे नन्हे खरगोश ने नए उपाय से शेर को ख़त्म किया।

3. हमें अपने गुस्से के वशीभूत होकर अनावश्यक खतरे नहीं लेने चाहिए। जिस प्रकार शेर ने गुस्से में कुएं में कूदकर अपनी जान गवांई।

4. हमें अपनी ताकत का घमण्ड नहीं करना चाहिए।

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13/9/16

बूढ़ा बगुला और केकड़ा ज्ञानवर्धक कहानी

भरी गर्मी की तपती दोपहर में एक बूढ़ा बगुला तालाब के किनारे गर्दन झुकाए शांत भाव से खड़ा था। उसके इस शांत स्वाभाव को देखकर उसके मन में चल रहे भूचालों का अनुमान लगाना मुश्किल था।

जीवन में अलग-अलग फेज़ आते हैं। जब हम बच्चे होते हैं तो माँ-बाप हमारी देखभाल करते हैं, और जब हम जवान होते हैं तब हम अपनी बाजुओं की ताकत, उद्यमिता और बुद्धि से अपना जीवन यापन करते हैं। किन्तु जब बुढ़ापा आता है तब ना तो हमारे माँ-बाप ही होते हैं ना ही हमारी बाजुओं में इतनी ताकत होती है की हम अपना जीवन यापन कर सकें।

बुढ़ापे में दिन प्रतिदिन परिस्थितियाँ बद से बदतर होती जाती हैं। और हमारी सारी इन्द्रियाँ हमारा साथ छोड़ने लगती हैं। और एक ऐसा समय आता है जब हमारे लिए पेट भरना भी मुश्किल हो जाता है। फिर हमें उस अपरिहार्य दुश्मन की शक्ति का एहसास होता है जिससे हम हजारों बार भी जीत जायें पर एक हार ही सब कुछ ख़त्म कर देती है।

आज उस बूढ़े बगुले को अपनी मौत दिखाई दे रही थी। इसी तलब के किनारे कितने ठाठ से हँसी ख़ुशी उसका बचपन और जवानी बीती थी। इस तालाब में खाने लायक इतनी मछलियाँ, मेढक और अन्य जीव थे कि आज तक कभी भी उसने भूखा रहने का सपना भी नहीं देखा था।

लेकिन धीरे-धीरे समय बीतता गया और अब बुढ़ापे ने उसे आ घेरा था। एक-एक कर उसकी इन्द्रियाँ और अन्य अंग कमजोर होते चले गए और तालाब से मछलियाँ और मेंढक पकड़ना मुश्किल होता चला गया। आज उसके जीवन में पहली बार ऐसा हुआ था कि वो पिछले दो दिनों से भूखा था। और आगे भी भोजन मिलने की कोई उम्मीद नज़र नहीं आ रही थी।

लेकिन वह बूढ़ा बगुला हार मानने वालों में से नहीं था। वो अभी और जीना चाहता था और इसके लिए जो भी जरूरी हो और जो भी वह कर सकता था वो करने के लिए वह पूरी तरह से तैयार था। जीने के लिए उसे भोजन की आवश्यकता थी और आज भले ही उसके बल ने उसका साथ छोड़ना शुरू कर दिया था परन्तु उसकी बुद्धि आज भी उसके साथ थी। और जो काम बल से ना हो सके उसके लिए बुद्धि का प्रयोग करना चाहिए ऐसा सोचकर वह बूढ़ा बगुला आज बहुत ही बुद्धिमत्तापूर्ण और कुटिल योजना के तहत वहाँ खड़ा हुआ था।

तालाब के किनारे गर्दन झुकाए शांत भाव से खड़े बूढ़े बगुले ने बीच-बीच में जोर-जोर से विलाप करना शुरू किया। “हे भगवान इस तलब के जीवों को सद्बुधि दे, और इन्हें महा प्रलय से बचा”।

बगुले का ऐसा विलाप सुनकर तालाब में रहने वाले एक केकड़े ने सोचा जिस बगुले को इस समय मछलियाँ और मेंढक पकड़ने चाहिए वो ऐसी अवस्था में विरक्त होकर विलाप कर रहा है जरूर कोई बात होगी। मुझे इसका पता लगाना चाहिए।

ऐसा सोचकर केकड़ा बूढ़े बगुले के पास गया और पूछा बगुला मामा जब आपको अपनी पेट पूजा करनी चाहिए ऐसे समय में आप यहाँ खड़े होकर विलाप क्यों कर रहे हैं?

इसपर बगुले ने कहा भांजे मुझे जो जानकारी मिली है उसके बाद तो मेरी भूख-प्यास ही मर गयी है। मेरा क्या है मैं तो बूढ़ा हो चुका हूँ। और वैसे भी जल्दी ही मरने वाला हूँ। पर मुझे तो तुम लोगों की चिंता हो रही है, जो जवानी में ही काल के गर्त में सामने वाले हैं।

बगुले की ऐसी बातें सुनकर केकड़ा घबरा गया। “ऐसी के बात हो गयी?” उसने पूछा।

बूढ़े बगुले ने कहा मुझे एक ज्योतिषि ने बताया है कि गृह नक्षत्रों का ऐसा मनहूस योग बना है कि अगले १२ वर्षों तक यहाँ बारिश नहीं होगी। और यह तालाब तो अभी से सूख रहा है देखो जहाँ पानी भरा रहता था वो जमीन आज धुप से तप रही है और ऐसी फट गयी है जैसे सबको निगल ही लेगी।

अब बारिश तो होने से रही और यह तालाब १२ वर्ष तो क्या १२ दिन में ही सूख जाने वाला है। तब सबकी मौत निश्चित है। पर इस तालाब के बाशिंदों को तो कोई चिंता ही नहीं है।

अब तो केकड़ा और भी अधिक घबरा गया। उसकी समझ में ही नहीं आ रहा था कि तालाब सूख जाने पर उसकी जान कैसे बचेगी। इसलिए उसने बगुले से पुछा तो इसका उपाय क्या है?

बूढ़े बगुले ने कहा इसका कोई अनोखा उपाय नहीं है। उपाय वही है जो दूर-दूर तक अन्य छोटे तालाबों के सारे रहवासी कर रहे हैं। वो अपने परिजनों और मित्रों को लेकर पूर्व दिशा में एक बहुत बड़े पाताली तालाब में जा रहे हैं। उस तालाब में पाताल से पानी आता है इसलिए १२ वर्ष तो क्या २४ वर्षों तक भी अगर पानी न बरसे तो भी वह पाताली तालाब पानी से भरा रहेगा। इस प्रकार दूसरे तालाबों के लोग आपस में इकट्ठे होकर और अपनी शत्रुता को भुला कर अपने लोगों की रक्षा करने में लगे हैं, पर यहाँ तो किसी को कुछ पड़ी ही नहीं है।

बूढ़े बगुले की ऐसी बातें सुनकर केकड़े ने तालाब में जाकर अन्य जीवों को ये बात बताई। देखते ही देखते भयंकर सूखे की यह बात तालाब के पानी में जंगल की आग की तरह फ़ैल गयी। अब तो तालाब में हर जगह बस एक ही बात हो रही थी। ऐसी चिंतापूर्ण बात उस तालाब के जीवों ने पहले कभी नहीं सुनी थी। जिसने भी सुना वो घबरा गया और अपनी जान बचाने के उपाय सोचने लगा।

कुछ जीव तो बहुत ही अधिक घबरा गए और सोचा क्यों न हम चलकर बूढ़े बगुले से ही सही जानकारी ले लें। ऐसा विचार विमर्श कर ये जीव केकड़े के साथ बगुले के पास पहुंचे। बगुले ने उन्हें वही कहानी फिर से सुनाई जो उसने केकड़े को सुनाई थी।

अब कुछ जीव जैसे मछलियाँ और मेंढक तो बहुत ही चिंतित हो गए। उन्होंने कहा हम कैसे किसी दूसरे तालाब में जा सकते हैं। हम तो पानी से ज्यादा दूर भी नहीं जा सकते, मछलियाँ तो पानी से बाहर ज्यादा देर जीवित भी नहीं रह सकती और उनको जमीन पर चलना भी नहीं आता।

इसपर बगुले ने कहा मैं हूँ ना। मेरा सारा जीवन इसी तालाब के सहारे बीता है और जब मैं बूढ़ा हो गया हूँ और इस संसार से विरक्त हो गया हूँ तो मैं भी इस तालाब के रहवासियों का भला कर कुछ पुण्य कमा लेना चाहता हूँ। मैं एक-एक कर तुम लोगों को अपनी पीठ पर बैठाकर पाताली तालाब पहुँचा दूंगा।

अब तो उस तालाब के बहुत से रहवासी बूढ़े बगुले के पास आने लगे और उसे मामा, चाचा, ताया, दादा आदि बोल कर उससे पाताली तालाब पहुँचाने का आग्रह करने लगे।

बूढ़ा बगुला एक-एक कर उन्हें अपनी पीठ पर बैठाकर प्रतिदिन पाताली तालाब के कई चक्कर लगाने लगा।

उसकी योजना सफल हो चुकी थी। वह बेवक़ूफ़ और डरपोक मछलियों और मेंढकों को पाताली तालाब ले जाने के बहाने अपनी पीठ पर बैठाता और कुछ दूर लेजाकर एक चट्टान पर पटक-पटक कर मार डालता और उन्हें खाकर अपना पेट भरता। फिर थोड़ा आराम कर और थोड़ा समय आस-पास ही व्यतीत कर वापस आता और उसके इंतजार में जमा हुए जीवों को पाताली तालाब के मजेदार किस्से सुनाता। और पाताली तालाब में गए मेंढक और मछलियाँ कितने खुश है उन्हें बताता।

इस प्रकार छल-कपट और अपनी बुद्धि के बल पर बूढ़ा बगुला अपना पेट भरने में सफल हो गया। धीरे-धीरे उसका स्वास्थ्य सुधर गया और वो काफी मोटा हो गया।

इधर केकड़े ने जब पाताली तालाब के किस्से सुने तो वो भी वहाँ जाने के बारे में सोचने लगा। और एक दिन वो बूढ़े बगुले के पास आया और उससे बोला बगुला मामा आपके पास सबसे पहले मैं आया था और आप मुझे ही पाताली तालाब लेकर नहीं चल रहे।

केकड़े की बात सुनकर बूढ़े बगुले ने सोचा रोज-रोज वही मछलियाँ और मेंढक खाकर मैं ऊब चुका हूँ, क्यों न आज केकड़े की दावत उड़ाई जाय। ऐसा सोचकर उसने केकड़े को अपनी पीठ पर बैठाया और उस चट्टान की ओर उड़ चला जहाँ उसने मछलियों और मेंढकों को पटक कर मारा था।

केकड़े ने जब एक चट्टान पर हड्डियों का ढेर देखा तो उसने बूढ़े बगुले से पुछा मामा वो सामने उस चट्टान पर हड्डियों का ढेर क्यों लगा हुआ है?

बगुले को केकड़े के भोलेपन पर बहुत हँसी आ रही थी। उसने कहा ये उन मछलियों और मेंढको की हड्डियाँ हैं जिन्हें मैं अपनी पीठ पर बैठाकर लाया था। ऐसा कहकर बूढ़ा बगुला अपनी चालाकी और केकड़े के भोलेपन पर जोर-जोर से हंसने लगा।

अब केकड़ा सारी बात समझ चुका था और उसे अपनी बेवकूफी पर बहु गुस्सा आ रहा था। उसने अपने मजबूत बाजुओं से बगुले की गर्दन पकड़ी और अपने नुकीले दांतों से उसे काट दिया। बूढ़े बगुले की इन्द्रियाँ आज उसकी बुद्धि पर भारी पड़ी थीं, नया स्वाद चखने के चक्कर में आज उसकी इह लीला समाप्त हो गयी।

उधर तालाब पर कई मछलियाँ और मेंढक बूढ़े बगुले का इन्तजार कर रहे थे। हर कोई चाहता था की वह ही बूढ़े बगुले से सबसे पहले मिले ताकि बूढ़ा बगुला उसे पाताली तालाब ले जाये। तभी उन्हें बूढ़े बगुले की गर्दन अपने बाजू में दबाए केकड़ा आता दिखाई पड़ा। केकड़े ने उन्हें बूढ़े बगुले की सारी चाल बतायी।

तालाब के जीव दुख, क्रोध और कृतघ्नता के भावों से भर गए थे। अपने डर पर बहुत शर्मिंदा थे। बगुले के लालच ने ही आज उन सबकी जान बचाई थी।

मित्रों इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है

1. जो काम बल से नहीं हो सकता वो बुद्धि से किया जा सकता है। इसलिए हमें अपनी सफलता के लिए बल और बुद्धि दोनों का प्रयोग करना चाहिए। जिस प्रकार बूढ़ा बगुला अपने बल के कमजोर होने पर अपनी बुद्धि से अपना पेट भरने में सफल हो गया।

2. जब कोई किसी काम को करने की ठान ले और उस काम के लिए जो भी जरूरी हो वो करे तो उसे सफलता अवश्य मिलती है।

3. हमें अपनी इन्द्रियों के वशीभूत होकर अनावश्यक खतरे नहीं लेने चाहिए। जिस प्रकार बगुले ने अपनी जीव्हा के वशीभूत होकर केकड़े के हाथों अपनी जान गवांई।

4. हमें अपने दुश्मनों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। जिस प्रकार मछलियों और मेंढकों ने बूढ़े बगुले पर विश्वास कर अपनी जान गंवाई।

5. हमें डूम्स डे दिखाने वालों यानि प्रलय आने वाली है या बहुत बुरा कुछ होने वाला है ऐसा कहने वालों से सावधान रहना चाहिए।

6. हमें जो खतरे हैं उनसे सदा सावधान रहना चाहिए। अक्सर लोग असावधान हो जाते हैं जिससे दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जाती है।

बूढ़े बगुले की हालत तो मरता क्या न करता वाली थी। लेकिन आपको समाज में ऐसे बहुत से लोग मिल जायेंगे जो आपको झूठे डर दिखा कर अपना उल्लू सीधा करते हैं और आपके जान माल का नुकसान करते हैं। क्या आपका भी पाला ऐसे किसी धूर्त और धोकेबाज इंसान से पड़ा है? वह धूर्त पीर, फ़कीर, बाबा, तांत्रिक, ज्योतिषि, डॉक्टर, पुलिस, नेता या अन्य किस पेशे से था? हमें ईमेल या कमेंट के माध्यम से बताएं।

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7/8/16

अपनी सफलता के लिए SWOT एनालिसिस कैसे करें

स्वाट एनालिसिस कैसे करें
मित्रों कोई भी काम, नौकरी, प्रोजेक्ट या बिज़नेस करने के पहले हमारे सामने दुविधा होती है कि मुझे ये काम करना चाहिए या नहीं? क्या इसमें मुझे सफलता प्राप्त होगी या नहीं? किसी बिज़नस या प्रोजेक्ट में हम कितने पानी में हैं? इस प्रकार की समस्याओं के रणनीतिक (strategic) समाधान के लिए SWOT एनालिसिस किया जाता है।

इस पोस्ट में हम जानेंगे की SWOT एनालिसिस क्यों किया जाता है? SWOT एनालिसिस क्या होता है? और एक उदाहरण के साथ हम जानेंगे कि SWOT एनालिसिस कैसे किया जाता है? और SWOT एनालिसिस करते समय हमे क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

SWOT एनालिसिस क्यों किया जाता है? Why SWOT Analysis Is Done?


दरअसल किसी भी काम को करने के पश्चात् यदि वांछित सफलता नहीं मिलती तो हमारी मेहनत, रिसोर्स और समय बर्बाद हो जाता है।

इसलिए किसी भी काम को करने के पहले हमारी उसमें सफलता या विफलता की क्या संभावनाएं हैं, जान लेना काफी फायदेमंद होता है।

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए उस कार्य के बारे में हमारी जितनी अधिक जानकारी होगी या जितना अधिक अनुभव होगा उतना ही सही तरीके से हम उस कार्य की सफलता या विफलता का अंदाजा लगा सकते हैं।

इस प्रकार किसी कंपनी या व्यक्ति के किसी प्रोजेक्ट या कार्य में सफलता का अनुमान लगाने के लिए एक तकनिकी इस्तेमाल होती है जिसे हम स्वाॅट(SWOT) एनालिसिस कहते है।

SWOT अंग्रेजी के चार शब्दों के प्रथमाक्षरों (initial letters) से मिल कर बना है। ये शब्द हैं

Strength(शक्ति)

Weakness(कमजोरी)

Opportunities(मौके)

Threats(खतरे)

SWOT Analysis के द्वारा हम किसी भी कार्य के लिए हमारी strengths और weaknesses क्या है। तथा हमारे सामने क्या opportunities तथा क्या threats (खतरे) हो सकते हैं इन सबका एनालिसिस करते हैं।

इस प्रकार स्वाॅट एनालिसिस के द्वारा हम जान सकते हैं की किसी कार्य या बिज़नस के सफल होने की संभावनाएं हैं। और इसके लिए हमें क्या स्ट्रेटेजीज अपनानी होंगी।

अब आप जान गए कि स्वाॅट एनालिसिस के क्या फायदे हैं तो आइये अब जानते हैं कि स्वाॅट एनालिसिस किया कैसे जाता है?


स्वाॅट एनालिसिस किया कैसे जाता है? How SWOT Analysis Is Done?


स्वाॅट एनालिसिस करने के लिए सबसे पहले हमारे पास कोई प्रोजेक्ट, बिज़नस या बिज़नस आईडिया या कोई कार्य होना चाहिए जो आप या आपकी कंपनी करती है या शुरू करना चाहती है।

अब इस कार्य को सफलता पूर्वक पूरा करने के लये दो निकाय हैं एक है आप आपकी टीम या कंपनी जिसकी strength या weakness आपको जानना है और दूसरा है आपका वातावरण (environment) यानि आपका देश, प्रान्त, शहर, नियम-कानून, आपके competitors अदि जिनके द्वारा आपको मौके या खतरे हो सकते हैं।

जब आप स्वाॅट एनालिसिस करें तो आपको अपने आप को पहचानना आना चाहिए या आप अपने किसी परिचित मित्रों का भी सहयोग ले सकते हैं जो आपको आपको और आपकी कमजोरियों और ताकतों को शायद आपसे भी अच्छी तरह जानते हों। इसी प्रकार अपने वातावरण द्वारा उपलब्ध मौके और खतरे जानने के लिए आप एक्सपर्ट्स की सलाह भी ले सकते हैं।

अब आप अपने उद्देश्य के हिसाब से अपनी शक्तियों, कमजोरियों, मौकों और खतरों को लिख लीजिये। इसको आप निम्न टेबल से भी समझ सकते हैं।

उद्देश्य प्राप्ति में

सहायक

उद्देश्य प्राप्ति में

बाधक


आंतरिक उत्पत्ति

आपके गुण

S

शक्ति

W

कमजोरी

वाह्य उत्पत्ति

वातावरण के गुण

O

मौके

T

खतरे

स्वाॅट एनालिसिस का एक उदहारण Example Of SWOT Analysis


मित्रों ग्रामीण क्षेत्र के मार्केट में कपड़ों की एक पुरानी दुकान है जो काफी चलती है जिसे मनोज नाम का दुकानदार चलता है। पर पिछले एक साल में वहाँ पर कपड़ों की दो नयी दुकानें खुल गयी हैं। शुरू में मनोज ने सोचा कि ये नयी दुकाने ज्यादा नहीं चलेंगी पर हाल ही में उन्हें पता चला है की नए दुकानदार भी लगभग उनके जितना ही प्रॉफिट कमा रहे हैं।

अब ऐसी परिस्थितियों में मनोज के लिए ये जानना जरूरी हो जाता है कि इन नयी दुकानों से उनके बिज़नस पर क्या असर होगा? और वे ऐसा क्या कर सकता हैं जो उनकी कमाई को कम होने से बचा सके।

इसके लिए मनोज ने SWOT एनालिसिस किया और अपनी शक्ति, कमजोरी, मौके और खतरों को इस प्रकार लिखा

शक्तियां(Strengths)-


1. हम पुराने हैं इसलिए हमारी ग्राहकी बंधी हुयी है और आस-पास के सभी गाँवों से लोग हमारे यहाँ आते हैं।

2. हमरा व्यवहार सही है और हमारे यहाँ आने वाले लोगों को हम जानते पहचानते हैं इसलिए वे हमारे यहाँ से ही कपड़े खरीदते हैं।

3. हम अन्य लोगों की तुलना में कपड़े सस्ते में बेचते हैं, क्योंकि हम कई शहरों से माल मंगाते हैं।

4. हम कपड़े उधार में भी देते हैं, इसलिए हमारे यहाँ से बहुर दूर-दूर के लोग फाइनेंसियल स्ट्रेस के समय जैसे शादी आदि में कपड़े ले जाते हैं।

कमजोरीयां(Weaknesses)-


1. सस्ते कपड़े बेचने की वजह से हमारे यहाँ लोग सस्ते कपड़े ही ज्यादा खरीदते हैं जिसमें हमें कम मार्जिन मिलता है। और अधिक मार्जिन वाले महंगे कपड़े हमारे यहाँ से कम बिकते हैं।

2. उधर देने की वजह से हर साल लगभग 1 से 2 लाख रुपयों की रिकवरी नहीं हो पाती और हमारा प्रॉफिट काम होता है।

3. उधार न चुकाने वाले लोग हम उधार वापस न मांग लें इस डर से अक्सर हमरी दुकान पर आना बंद कर देते हैं, जिससे बिक्री में कमी आती है।

मौके(Opportunities)-


1. आस पास के दुकानदार कपड़े हमारे यहाँ से महंगे बेचते हैं। इसलिए हम भी अपने यहाँ प्राइस बढ़ाकर अपना प्रॉफिट बढ़ा सकते हैं।

खतरे(Threats)-


1. हमारे ही मार्केट में दो नयी दुकानें खुल गयीं हैं, जिन्होंने सीसे के दरवाजे लगाये हैं और उनके दुकान के सामने कपड़ों का डिस्प्ले अच्छा लगता है जिससे लोग खासकर ज्यादा पैसे खर्च करने वाले और शहरों में कमाने वाले उन दुकानों की ओर आकर्षित होते हैं।

2. नयी दुकानों में AC लगा है जिससे गर्मियों में जो ग्राहक उनके यहाँ बैठ जाता है महंगा ही सही वहाँ से ही कपड़े ले लेता है।

इस प्रकार दोस्तों अपनी दुकान के स्वाॅट एनालिसिस से मनोज को अपनी स्थिति का सही सही अंदाजा हो गया। और अब वो अपना लाभ बढ़ाने के लिए कई निर्णय ले सकता है जैसे सीसे और AC लगवाना, कीमतें बढ़ाना, उधार बंद करना आदि।

स्वाॅट एनालिसिस करते समय सावधानियाँ Precautions During SWOT Analysis


मित्रों स्वाॅट एनालिसिस एक टूल है और किसी भी अन्य टूल की ही तरह इसका इस्तेमाल और उपयोगिता भी इस टूल का प्रयोग करने वाले की दक्षता पर निर्भर करता है। हर एक टूल की कुछ सीमायें होती हैं और इअसका इस्तेमाल करने वालों को इन सीमाओं का ज्ञान होना आवश्यक होता है।

स्वाॅट एनालिसिस कोई मैजिक बुलेट नहीं है कि इसका इस्तेमाल करते ही आपके बिज़नस या कार्य की सारी समस्याएं दूर हो जाएँगी। लेकिन ये आपको सोचने को मजबूर करता है और आपको निर्णय लेने में सहायता करता हैं।

SWOT Analysis के कुछ limitations मैं आपको बताता हूँ

1. स्वाॅट एनालिसिस में आपकी strengths, weaknesses और आपके environment द्वारा उत्पन्न opportunities और threats की जानकारी आपको स्वयं जुटानी पड़ती है, जो आपके नॉलेज और experience पर निर्भर करता है। इसमें कुछ चीजें काफी मुश्किल हो सकती हैं जैसे अपने competitors की जानकारी।

2. इसमें कई बार लोग सिर्फ लिखने के लिए बहुत से पॉइंट लिख देते हैं जिनकी संभावना या impact अधिक नहीं होता। इसलिए इन पॉइंट्स को लिखने के बाद इनको इनके महत्व के आधार पर sort कर लेना चाहिए।

निष्कर्ष Conclusion


इस प्रकार आपने SWOT एनालिसिस के बारे में जाना। अब अगर आपके पास भी कोई काम, बिज़नस, नौकरी या प्रोजेक्ट है तो तुरंत कीजिये SWOT एनालिसिस और अपनी सफलता की संभावनाओं को सुनिश्चित कीजिये। एक बात और कोई भी नयी चीज सीखकर उसका प्रयोग करने की दक्षता आने में प्रैक्टिस और समय लगता है। इसलिए आप SWOT एनालिसिस अभी से शुरू कर दीजिये ताकि आप इसमें जल्द से जल्द एक्सपर्ट बन जायें और कौन कितने पानी में है ये जान सकें।

दोस्तों SWOT एनालिसिस पर मेरी यह post कैसी लगी? कमेंट या ईमेल के द्वारा हमें बता सकते हैं। हमारा ईमेल पता है safalbharat.com@gmail.com ।


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31/7/16

फेसबुक के आप पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव Bad Effects Of Facebook

फेसबुक के बुरे प्रभाव
आज का युग internet का युग है और internet के इस युग में दुनिया के सबसे बड़े social media यानि फेसबुक का बोलबाला है। आज कोई व्यक्ति जब internet इस्तेमाल करना शुरू करता है तो ब्राउज़र का इस्तेमाल करना भले ही ना सीखे पर फेसबुक का profile पहले बनाता है। यहाँ तक कि अगर कोई खुद profile नहीं बना सकता तो वो दूसरों से अपना profile बनवाता है।

फेसबुक हमारे लिए काफी उपयोगी है, इसके द्वारा मित्र-रिश्तेदारों से कम्यूनिकेट करना बहुत ही आसान हो जाता है।

मैं पहले भी लिख चुका हूँ कि फेसबुक के लिए उसके users यानि आप उसके उत्पाद हैं। आप जो भी एक्टिविटी फेसबुक पर करते हैं वो सब लाॅग होती रहती है और फेसबुक इनका प्रयोग आपको समझने और आपके भविष्य की एक्टिविटीज जानने के लिए करता है। तथा इसी जानकारी की मदद से वो प्रचारकों को लुभाता है।

फेसबुक के प्रयोग से आपको बहुत से नुकसान भी होते हैं, जिनसे हमें हमेशा सावधान रहना चाहिए। अब किसी भी खतरे से निबटने के लिए पहले हमें उन खतरों को पहचानना पड़ता है। इसलिए पहले यहाँ दिए गए फेसबुक के बुरे प्रभावों को जानिये और देखिये आप पर कौन से बुरे प्रभावों का असर हो रहा है। उसके बाद उन बुरे प्रभावों निपटने के उपाय कीजिये।

  1. फेसबुक समय व्यर्थ करता है– मित्रों संस्कृत में एक श्लोक है “अति सर्वत्र वर्जयेते” यानि अति किसी भी काम में नहीं करनी चाहिए। लेकिन बहुत से लोग अपना बहुत सा कीमती समय फेसबुक पर बिताते हैं जिससे उनके अन्य जरूरी काम पूरे नहीं हो पाते। खासकर स्टूडेंट्स के ऊपर तो फेसबुक का बहुत असर पड़ता है और इसके ज्यादा इस्तेमाल से उनकी पढाई पर बुरा असर होता है। लोग मिनट-मिनट में फेसबुक चेक करते हैं और अपना समय बर्बाद करते हैं।
  2. Facebook आपको डिप्रेश करता है– जी हाँ मित्रों फेसबुक और फेसबुक friends आपके सामने ऐसा माहौल बना देते हैं जिससे आपको डिप्रेशन हो सकता है। फेसबुक पर लोग हमेशा अपनी achievements को ही share करते हैं।अब अगर आपके फेसबुक पर सैकड़ों friends हैं तो रोज कोई न कोई friend अपनी कुछ न कुछ achievement जैसे कोई नयी purchase या कोई tour या कोई event की फोटो या स्टेटस share करता है। इसकी वजह से आपको ऐसा लगता है जैसे हर कोई आपसे काफी अधिक खुश और अच्छी स्थिति में है।

    पर असल में भी ऐसा ही हो ये जरूरी नहीं। क्योकि जब लोग समस्याओं से जूझ रहे होते हैं या फिर उनके साथ कुछ बुरा होता है तो अक्सर वो ये बातें फेसबुक पर पोस्ट नहीं करते। इससे फेसबुक पर एक प्रकार का bias पैदा हो जाता है जहाँ हर कोई खुश नजर आता है। और जब आप अपनी असली जिंदगी की तुलना फेसबुक पर उपलब्ध इन ख़ुशी भरी posts से करते हैं तो आपको लगता है कि आप अन्य लोगों की तुलना में ग़रीब, दुखी हैं और आपके जीवन में कुछ exiting नहीं हो रहा है।

    इन बातों से आप समझ गए होंगे कि फेसबुक किस प्रकार ऐसा माहौल बनता है जो आपको डिप्रेशन में ले जा सकता है।
  3. फेसबुक पर चीटिंग और फ्रॉड का खतरा रहता है– फेसबुक internet के माध्यम से चलता है जहाँ पर हर एक व्यक्ति की असलियत को verify करना संभव नहीं है। ऐसे में हम उनके द्वारा दी गयी जानकारी को ही सही मानकर चलते हैं इससे ऐसे लोगों पर भरोसा करना हमें काफी भरी पड़ सकता है।

    हालांकि फेसबुक की टर्म्स एंड पॉलिसीस में अपने बारे में गलत जानकारी देना allowed नहीं है पर इसको फेसबुक verify नहीं कर सकता।ऐसी स्थिति में फेसबुक पर फ्रॉड की खबरें अक्सर अखबारों में आती रहती हैं। इसके अलावा फेसबुक पर share की गयी जानकारियों की सत्यता प्रमाणित करना भी मुश्किल होता है और इसी का फायदा उठाकर कुछ लोग फेसबुक पर झूठ फैलाते रहते हैं।
  4. फेसबुक से छात्रों का रिजल्ट खराब होता है– फेसबुक के अधिक इस्तेमाल से छात्रों की पढाई पर बुरा असर होता है। खासकर फेसबुक notifications और messenger पर chat रिक्वेस्ट से पढ़ाई बहुत डिस्टर्ब होती है और उनका रिजल्ट खराब हो जाता है।
  5. फेसबुक से आपका स्वास्थ्य खराब होता है– फेसबुक का अधिक इस्तेमाल करने वाले दिन भर अपने मोबाइल या ल[पटप से चिपके रहते हैं जिससे उनकी physical एक्टिविटीज कम हो जाती हा जो आपके हेल्थ के लिए अच्छा नहीं है।
  6. फेसबुक का अधिक इस्तेमाल करने वालों को मौत का भी खतरा रहता है– जो लोग फेसबुक पर अजीब अजीब और खतरनाक जगहों की selfie पोस्ट करते रहते हैं उनकी इन खतरनाक जगहों पर selfie लेने के चक्कर में जान जाने का भी खतरा बना रहता है। selfie डेथ की ख़बरें आए दिन अखबारों में छपती रहती हैं।
  7. फेसबुक आपको internet से अलग कर देता है– जी हाँ फेसबुक भले ही internet पर ही चलता है पर इसके features आपको internet का इस्तेमाल ना कर फेसबुक पर ही रहने के लिए बाध्य कर देते हैं जिससे आप internet पर अन्य एक्टिविटीज करने के बजाय फेसबुक तक ही सिमित रह जाते हैं। और फेसबुक में जो share हुआ, जो न्यूज़ आयी, जो विडियो आया वही देखकर जानकारी जुटाते हैं। इस प्रकार आप internet के इस्तेमाल का पूरा फायदा नहीं उठा पाते।
  8. Facebook आपकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर सकता है– कुछ समय पहले फेसबुक ने एक experiment किया था जब उन्होंने लोगों के फेसबुक फीड में आने वाले posts को फ़िल्टर किया। यानी किसी को सिर्फ अच्छी खबरों वाले posts दिखाए और किसी को सिर्फ बुरी खबरों वाले posts। इसके बाद इन लोगों पर होने वाले प्रभाव को देखा गया। इस प्रयोग से यह स्पष्ट हो गया की फेसबुक पर जिस प्रकार की posts ज्यादा आती हैं लोगों का मूड भी वैसा ही हो जाता है।

    मतलब फेसबुक हमारी भावनाओं को बदल सकता है। यह स्थिति किसी भी समाज के लिए ठीक नहीं होती। क्योंकि यह फेसबुक को एक ऐसी शक्ति दे देती है जो लोगों का काफी नुक्सान कर सकती है। इसलिए फेसबुक का प्रयोग देश के दुश्मन प्रोपेगैंडा फ़ैलाने के लिए भी कर सकते हैं।

    आप थोड़ा ध्यान से देखेंगे तो आप को समझ में आयेगा की यह प्रोपेगैंडा वार फेसबुक पर चल रहा है और इस के लिए लोग आपस में भी लड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं।

    लोगों को लगता है की वे समाज के लिए कुछ अच्छा कर रहे हैं लेकिन दरअसल लोग इस प्रोपेगैंडा वार के मोहरे बन कर रह जाते हैं।
  9. False sense of activism– फेसबुक पर अक्सर लोग समाज में फैली कुरीतियों को लेकर काफी अच्छे कमेन्ट करते हैं और किन्ही घटनाओं के समर्थन या विरोध में अपना dp चेंज करते हैं। इससे उन्हें लगता है की वो समाज में कोई पॉजिटिव चेंज लाने वाले हैं। पर कुछ मामलों को छोड़कर जायदातर आपके इन कमेंट्स या dp चेंज करने से कोई फर्क नहीं पड़ता। सिर्फ आपका और आपके अपनों का समय बर्बाद होता है। इस तरह से समाज सुधारक बनाने के चक्कर में लोग अक्सर प्रोपेगैंडा वार के मुहरे बन कर रह जाते हैं।
  10. फेसबुक offices में employees की productivity को कम कर देता है– फेसबुक जब शुरू में आया था तो स्मार्ट फोन नहीं थे और मोबाइल internet का भी प्रचालन बहुत काम था। जब आप फेसबुक यूज़ करना चाहते थे तो आपको डेस्कटॉप या लैपटॉप पर बैठ कर इसे उसे करना पड़ता था।इस वजह से कम्पनियाँ ऑफिस टाइम में आपके फेसबुक के प्रयोग को बंद या सिमित कर सकती थीं।

    पर आज स्मार्ट फोन और मोबाइल internet के जमाने में यह काम असंभव सा हो गया है। आज लोग ऑफिस में भी अपने मोबाइल पर फेसबुक का इस्तेमाल करते रहते हैं इससे उनका काम का समय बर्बाद होता है और उनकी प्रोडक्टिविटी कम हो जाती है।
मित्रों इस तरह आप देखते हैं कि फेसबुक के इस्तेमाल से हमें क्या क्या नुकसान होते रहते हैं। आपको ऐसा लग सकता है कि ये नुकसान केवल फेसबुक का अधिक इस्तेमाल करने वालों को ही होता है पर ऐसा नहीं है।

फेसबुक का इस्तेमाल अगर आप प्रतिदिन 10 मिनट भी करते हैं तो भी आपको इसमे से कुछ नुकसान जैसे डिप्रेशन आदि हो सकते हैं।

जरूर पढ़ें फेसबुक इतने पैसे कैसे कमाता है? How Does Facebook Earns So Much Money?

दोस्तों फेसबुक के आप पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव इस विषय पर मेरी यह post कैसी लगी? कमेंट या ईमेल के द्वारा हमें बता सकते हैं। हमारा ईमेल पता है safalbharat.com@gmail.com ।


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25/7/16

अंग्रेजी बोलना कैसे सीखें कुछ बेहतरीन टिप्स

अंग्रजी बोलना कैसे सीखे बेस्ट टिप्स
दोस्तों मेरी पिछली दो पोस्टों में आपने अंग्रेजी बोलना सीखने के क्यों, क्या और कैसे को जाना। अब मैं आपको अंग्रेजी बोलने के कुछ बेहतरीन टिप्स (मेरी समझ से) दूंगा। इन टिप्स के प्रयोग से न सिर्फ आपका अंग्रेजी बोलना सीखने का प्रयास आसान हो जायेगा बल्कि आप अंग्रेजी बोलना जल्दी सीख भी पाएंगे।

अगर आपने मेरी पिछली दो posts नहीं पढ़ी हैं तो उन्हें नीचे दिए लिंक पर क्लिक कर के पढ़ सकते हैं

English बोलना कैसे सीखें भाग १(क्यों? और क्या?)

English बोलना कैसे सीखें भाग २(कैसे?)

  1. अंग्रेजी बोलने के लिए जब आप अपने शब्द भण्डार (Vocabulary) को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हों तो जो शब्द प्रचलन में ज्यादा हैं उनको पहले सीखने की कोशिश करें न कि कम इस्तेमाल होने वाले और कठिन शब्दों को।

    देखिये अधिक इस्तेमाल होने वाले और सरल शब्दों को आप आसानी से सीख सकते हैं और बार-बार इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे आपको इन शब्दों का ज्ञान बहुत जल्दी हो जाता है।

    दूसरी ओर कठिन और कम इस्तेमाल होने वाले शब्दों का बोलचाल में एक तो प्रयोग करना आपके लिए मुश्किल होगा और दूसरा इनका इस्तेमाल करने के मौके आपको कम मिलेंगे। इससे आप इनको जल्दी नहीं सीख पायेंगे और आपकी मेहनत बेकार जायेगी।

    मैं यहाँ पर सामान्य अंग्रेजी बोलचाल की बात कर रहा हूँ, किसी स्पेशलाइज्ड क्षेत्र जैसे साइंस, इंजीनियरिंग, क़ानून या मेडिकल की नहीं। मेरा मतलब है कि अगर आप मानसिक रोगों की चिकित्सा से जुड़े हैं तो आपको schizophrenia शब्द सिखना ही होगा चाहे यह कितना ही कठिन क्यों न हो।

    हाँ एक बात जरूर है की किसी फील्ड से जुड़े शब्द कठिन भले ही हों पर उस फील्ड के लोगों के बीच उन शब्दों का इस्तेमाल अधिक होता है इससे आप इन्हें जल्दी सीख सकते हैं।
  2. मैं पहले ही बता चुका हूँ कि अंग्रेजी बोलना सीखने के लिए आपको शुरू से ही अंग्रेजी में बात करना शुरू करना होगा। अब कई बार ऐसा हो सकता है कि आप किसी से बात कर रहे हों और आप कुछ कहना चाहते हो पर आपको अंग्रेजी में वाक्य बनाने में या सही शब्द याद करने में समय लग रहा है।

    ऐसे में यदि आप काफी समय तक चुप रहते हैं तो सामने वाला ये सोच सकता है कि आप उससे बात नहीं करना चाहते या आपसे जो पुछा जा रहा है वो आपको मालूम नहीं। ऐसे में या तो वो किसी और से बात करने लगेगा या कुछ और पूछने लगेगा।

    ऐसी स्थिति में जब आप कुछ सोच रहे हैं तो सामने वाले को भी बताएं कि आप कुछ सोच रहे हैं। इसके लिए आप कुछ ध्वनियों का प्रयोग कर सकते हैं जैसे ऊँऽऽऽऽऽ, अऽऽऽऽऽऽ, हूँऽऽऽऽऽऽऽ आदि। इन्हें hesitation devices कहते हैं। इस प्रकार आप आप hesitation devices का प्रयोग कर टाइम buy कर सकते हैं और अपना वाक्य तैयार कर के बोल सकते हैं।
  3. कई बार कोई शब्द एकदम याद ही न आने पर आप आपनी बात को अन्य शब्दों द्वारा describe कर के भी बोल सकते हैं। यहाँ तक की आप अपने सामने वाले से भी शब्द पूछ सकते हैं। इसके लिए आप कहें What was the word for और फिर उस चीज को अन्य शब्दों या इशारों में समझाएं। ऐसा पूछने पर अगर सामने वाले को आपकी बात समझ में आ गयी तो वो खुद आपको सही शब्द बता देगा।
  4. अगर आपको अच्छी अंग्रेजी नहीं आती तो बहुत तेज बोलने की कोशिश न करें बल्कि रुक-रुक कर आराम से बात करें। देखिये आप कोई न्यूज़ एंकर तो हैं नहीं कि आपको फ़टाफ़ट 10 मिनट में 100 खबरें सुनानी हैं। So Relax!

    आराम से रुक-रुक कर बोलने का एक फायदा ये भी होता है कि इससे सामने वाले को अंदाजा हो जाता है कि आप आराम से बोलेंगे इसलिए वो आपके बोलने का इंतज़ार करता है। वहीँ अगर आप कुछ बातें बहुत जल्दी से बोल देते हैं और कुछ बातों में समय लगाते हैं तो देर लगने पर सामने वाला समझता है कि आप कुछ बोलना नहीं चाहते। इसलिए consistent रहने का प्रयास करें।
  5. अंग्रेजी में बात करते समय बोल-चाल की भाषा का प्रयोग करें। अंग्रेजी में बात करने के कम मौके मिलने पर जब आप अंग्रेजी पढ़कर और न्यूज़ आदि सुनकर बात करना शुरू करतें हैं तो आप bookish लैंग्वेज बोलते हैं। जो सामान्य बोलचाल में अटपटा लग सकता है।

    मैंने जब अंग्रेजी बोलना शुरू किया तो जैसे ही मैं कुछ बोलता था लोगों को shock लगता था और वो हँसने लगते थे। आप सोच रहे होंगे कि मैं कुछ गलत बोल देता था या मेरी बात सामने वाले को समझ में नहीं आती थी पर ऐसा नहीं था। ऐसा होने के दो कारण थे पहला तो मेरे उच्चारण में मेरी मातृभाषा का असर होता था और दूसरा मैं किताबी भाषा का प्रयोग करता था जिसमें वाक्य लम्बे और शब्द कठिन होते थे। अब आप ही सोचिये एक तो कठिन शब्द और उसपर उच्चारण अजीब ऐसे में किसे हँसी नहीं आयेगी।
  6. अंग्रेजी बोलने के लिए आप अंग्रेजी में ही सोचिये। अंग्रेजी बोलते समय अंग्रेजी में ही सोचने के कई फायदे हैं।

    इससे अपनी भाषा में सोचकर उसे अंग्रेजी में ट्रांसलेट करने का समय बाच जाता है।

    हर भाषा का अपना एक structure होता है और हर भाषा के अपने शब्द होते हैं जिनके तुल्य शब्द दूसरी भाषा में भले ही मिल जायें पर ये जरूरी नहीं की इन शब्दों का प्रयोग उतना ही सामान्य बोलचाल में भी होता हो।

    जैसे मैंने अपनी पोस्ट सीरीज का टाइटल “अंग्रेजी बोलना कैसे सीखें” रखा है अब मैं इसको अंग्रेजी में ट्रांसलेट करता हूँ तो इसका टाइटल होगा “How To Learn To Speak English” लेकिन अगर मैं यह टाइटल अंग्रेजी में ही सोचता तो मैं इसका टाइटल “How To Learn Spoken English” रखता।
  7. अपनी social और नेटवर्किंग स्किल्स का प्रयोग करें अधिक से अधिक ऐसे groups और लोगों से जुड़ें जिनसे आप अंग्रेजी में बात कर सकें। ये लोग अंग्रेजी में बात करने वाले या आप की ही तरह से अंग्रेजी बोलना सीखने के इच्छुक हो सकते हैं।
  8. अंग्रेजी सीखने के कोर्स join करें। लेकिन ध्यान रहे ऐसे कोर्सेज को ही चुने जिनमें अंग्रेजी बोलने पर जोर हो और अंग्रेजी बोलने की प्रैक्टिस कराई जाती हो। वरना अंग्रेजी grammar आदि सीखते-सीखते और ग्रुप डिस्कशन की एक दो class में ही दो-तीन महीने निकल जायेंगे और कोर्स समाप्त होने पर भी आप की अंग्रेजी बोलने की क्षमता में कुछ ज्यादा इम्प्रूवमेंट नहीं हो पायेगा।
  9. अंग्रेजी से रिलेटेड काम या एक्टिविटी join करें। ऐसे काम करें जहाँ आपको अंग्रेजी सीखने या अंग्रेजी में बात करने के मौके मिल सकें। और अगर आपको ऐसा काम मिल सके जहाँ पर You can earn while you learn English फिर तो सोने पे सुहागा हो जायेगा। जैसे इंग्लिश कॉल सेंटर join करना।


दोस्तों अंग्रेजी बोलना कैसे सीखें इस विषय पर मेरी यह तीन posts की सीरीज इन टिप्स के साथ ही समाप्त होती है। मेरी आशा है कि इन articles से आपको अंग्रेजी सीखने में जरूर मदद मिलेगी। इसलिए अगर आप अंग्रेजी बोलना चाहते हैं तो न सिर्फ इन articles को पढ़ें बल्कि इनपर अमल भी करें। आप अपनी progress कमेंट या ईमेल के द्वारा हमें बता सकते हैं। हमारा ईमेल पता है safalbharat.com@gmail.com ।

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7/7/16

English बोलना कैसे सीखें How To Learn To Speak English Part 2

अंग्रेजी बोलना कैसे सीखे
दोस्तों अपनी पिछली पोस्ट में हमने अंग्रेजी बोलने के लिए एक आधार तैयार किया। और अब बारी है उस आधार पर इमारत खड़ी करने की। हो सकता है की बहुत से लोगों को ये लगे की पिछली पोस्ट में मैंने कुछ ख़ास नहीं बताया और उस पोस्ट की जरूरत ही नहीं थी। पर किसी इमारत की नीव का मजबूत होना बहुत जरूरी होता है। क्योंकि जब नींव मजबूत होगी तभी इमारत मजबूत होगी।

पिछली पोस्ट में आपने जाना की आपको English बोलना क्यों सीखना चाहिए और English बोलने के लिए किन-किन चीजों की आवश्यकता होगी। आइये अब इस पोस्ट में हम जानते हैं कि आप English बोलना कैसे सीख सकते हैं?

1. English बोलना सीखने के लिए English सुनिए

इंसान कोई भी भाषा सुन-सुन कर ही सीखता है। जो वह सुनता है उसी की नकल करता है और धीरे-धीरे उसे समझने लगता है।

इसलिए आप जितना अधिक अंग्रेजी सुन सकें उतना ही अच्छा है। अंग्रेजी सुनने के बहुत से साधन जैसे टीवी रेडिओ, फ़िल्में internet आदि हमारे पास मौजूद हैं इनका फायदा उठाइए और जितना हो सके उतना अंग्रेजी ध्यान पूर्वक सुनिए।

शुरू में हो सकता है की आप जो सुने उसका बहुत कम समझ में आए पर घबराइये नहीं लगे रहिये। यहाँ मुख्य बात ध्यान पूर्वक सुनना है। भले ही पांच मिनट में सिर्फ एक वाक्य ही आप समझे हों पर उस पर ध्यान दें और बार-बार दोहरायें।

2. अंग्रेजी बोलना सीखने के लिए अंग्रेजी में बात कीजिये

अंग्रेजी बोलने का सबसे जरूरी नियम है कि आप अंग्रेजी में बात करें। अब आप सोच रहे होंगे कि जब तक आप अंग्रेजी सीखेंगे नहीं तब तक आप अंग्रेजी बोलेंगे कैसे। भले ही यह सुनने में मुर्गी पहले आयी कि अंडा? जैसा लगे जिसका जवाब आज तक नहीं मिला।

लेकिन अंग्रेजी सीखने के मामले में जवाब बिलकुल आसान है। आप अंग्रेजी बोलते-बोलते अंग्रेजी सीखिए और अंग्रेजी सीखते-सीखते अंग्रेजी बोलिए।

मैं अपने ख़ुद के अनुभव से बताना चाहूँगा कि मुझे अंग्रेजी बोलना सीखने में काफी समय लगा क्योंकि भले ही मैं कितनी भी अंग्रेजी सुनता, पढ़ता या लिखता था पर मैं अंग्रेजी बोलता नहीं था। इसकी वजह से अंग्रेजी बोलने के जो मौके मुझे मिलते थे मैं वो भी इस्तेमाल नहीं कर पाता था।

मेरे लिए अंग्रेजी बोलना सीखने का यह सबसे मुश्किल पार्ट था। भले ही मैंने कितनी भी अंग्रेजी किताबें पढ़ रखी थी, भले ही मैंने अंग्रेजी शब्दों की डायरी बना राखी थी और English न्यूज़ पेपर से छाँट-छाँट कर शब्द उनके अर्थ और उनसे बनने वाले वाक्यों के उदहारण लिख रखे थे, भले ही मैंने Word Power Made Easy किताब से सैकड़ों root वर्ड्स सीख लिए थे, भले ही मैं मेरे सामने वाला अंग्रेजी बोलने में क्या गलती कर रहा है तुरंत पकड़ लेता था। लेकिन मैं अंग्रेजी नहीं बोल पाता था।

सच ये था कि मुझे अंग्रेजी बोलना नहीं अता था। उन लोगों के बराबर भी नहीं जिनकी गलतियाँ मैं पकड़ लेता था।

देखिये अंग्रेजी जानना और अंग्रेजी बोलना दो अलग अलग चीजें हैं। भले ही दोनों एक दूसरे पर dependent हैं लेकिन अगर आप अंग्रेजी जानते हैं तो इसका ये मतलब नहीं की आप अंग्रेजी बोल भी सकते हैं।

इसलिए आप चाहे जैसे भी हो अंग्रेजी बोलना शुरू कीजिये।

जी हाँ! अब आप अपने घमण्ड को अलग रख दीजिये और जैसा भी गलत-सही English बोल सकते हैं वैसा ही बोलिए। और फिर धीरे-धीरे इसमे सुधार कीजिये।

3. अंग्रेजी बोलना सीखने के लिए अंग्रेजी पढ़िए

जब हम किसी को अंग्रेजी बोलते सुनते हैं तो वह हमें बहुत तेज बोलता लगता है। हो सकता है उसकी ज्यादातर बातें आपको समझ में ही ना आये ऐसे में आप सीखेंगे कैसे? इसके लिए अंग्रेजी पढ़ना भी अंग्रेजी सीखने का एक तरीका है।

अब पढ़ाई दो तरीके से हो सकती है एक तो आप पढ़ते जायें पढ़ते जायें और थोड़ा बहुत जो समझ में आए समझते जायें। वहीँ दूसरा तरीका है कि आप थोड़ा ही पढ़ें उसे समझें, उसे बोलें, उस पर नोट्स बनायें और इस पढ़े हुए को भविष्य में समय-समय पर दुहराते रहें।

दोनों तरीकों से पढ़ने का अपना महत्व है। जहाँ तेजी से काफी ज्यादा पढ़कर आप नए-नए वाक्यों और शब्दों के संपर्क में आ सकते हैं वहीँ धीरे-धीरे पढ़कर आप नए पुराने वाक्यों और शब्दों को अपने दीमाग में पक्का कर सकते हैं जिससे आगे उनका इस्तेमाल बोलते समय कर सकें।

4. अंग्रेजी बोलना सीखने के लिए नोट्स बनाइये

आप जो भी अंग्रेजी सुनते, बोलते या पढ़ते हैं उसमें से जो भी आपको महत्वपूर्ण लगे उसे नोट कर लीजिये और बार बार दोहराइए। लिखने से आप एक एक चीज पर ज्यादा समय देते हैं और वो आपके दिमाग में क्लियर हो जाती है।

नोट्स बनाने के लिए आप अंग्रेजी या अन्य किसी भी भाषा का प्रयोग कर सकते हैं। ये भी जरूरी नहीं की आप अंग्रेजी लिखने के लिए रोमन लिपि का ही प्रयोग करें। आप देवनागरी लिपि में भी English लिख सकते हैं जैसे कि आप

I can speak English.

की जगह

आई कैन स्पीक इंग्लिश। भी लिख सकते हैं।

जरूरी बात ये है कि ये नोट्स आपके लिए उपयोगी होने चाहिए। इन नोट्स को देखकर भविष्य में आप अपनी progress का आकलन कर सकते हैं।

5. अंग्रेजी बोलने के लिए शर्म छोड़िये

जब आप अंग्रेजी बोलना शुरू करेंगे तो अक्सर आपको शर्मसार करने वाली परिस्थितियों (embarrassing situations) का सामना करना पड़ेगा। और कोई भी किसी के सामने शर्मसार नहीं होना चाहता। लेकिन कुछ भी नया सीखने का यही सबसे बड़ा नियम है कि आपको अपनी शर्म को इस मामले में छोड़ना पड़ेगा। हजारों साल पहले आचार्य चाणक्य ने कहा था

धन-धान्यप्रयोगेषु विद्यासंग्रहणेषु च।

आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्।।
–आचार्य चाणक्य

पैसे के लेंन-देन में, विद्या ग्रहण करने में, भोजन करने में और व्यवहार करने में जो शर्म नहीं करता वह सुखी रहता है।
–आचार्य चाणक्य

अगर आप गलतियाँ करने के डर से अंग्रेजी नहीं बोलते तो आप कभी भी अंग्रेजी नहीं बोल पाएंगे! क्योंकि आप कितनी भी पढ़ाई कर लें, चाहे आप अंग्रेजी में B.A., M.A. ही क्यों न कर लें, जब तक आप अंग्रेजी बोलेंगे नहीं तब तक आप अंग्रेजी सीखेंगे नहीं। और जब आप अंग्रेजी बोलना शुरू करेंगे तो आप से गलतियाँ होंगी ही। पर इन गलतियों से घबराइये नहीं, बल्कि अंग्रेजी बोलने का अभ्यास कर के इन गलतियों की संख्या को कम करते जाइये।

6.प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़िये

अंग्रेजी बोलना सीखने में समय लगता है। इसलिए आप थोड़ा-थोड़ा ही सही पर प्रतिदिन प्रयास कीजिये और आगे बढ़िये।

कई बार लोग बहुत ही काम समय में अंग्रेजी सीखने का लक्ष्य बना लेते हैं इससे उनके निराश होकर अंग्रेजी सीखना छोड़ देने की बहुत अधिक संभावना रहती है। इसलिए कितना समय लगता है इससे ज्यादा जरूरी हैं कि आप प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा ही सही पर progress करते रहें।

बूँद-बूँद से सागर भरता है वाली कहावत तो आपने सुनी ही होगी, बस आपको इसी को follow करना हैं। और आपकी सफलता निश्चित है।

मित्रों यहाँ पर बताये गए तरीकों से आप अंग्रेजी बोलना सीख सकते हैं। याद रखिये अंग्रेजी बोलना सीखने के लिए अंग्रेजी सुनना और अंग्रेजी बोलना ये दो सबसे महत्वपूर्ण काम हैं। अब इन कामों को करना आपके लिए कितना आसान या मुश्किल है ये आप की परिस्थितियों और आप पर निर्भर करता है।

लेकिन घबराइये नहीं अपनी अगली पोस्ट में मैं आपको कुछ ऐसी प्रैक्टिकल टिप्स दूंगा जो आपको यहाँ बताये गए तरीकों को implement करने में सहायक होंगी। और हाँ अपनी पिछली पोस्ट में मैंने कुछ बताने का वादा किया था वो भी मैं अपनी अगली पोस्ट में पूरा करूंगा।

जरूर पढ़ें अगला भाग अंग्रेजी बोलना सीखने के बेहतरीन टिप्स



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मित्रों यह अंग्रेजी बोलना कैसे सीखें इस विषय पर मेरी यह दूसरी पोस्ट आपको कैसे लगी अपने कमेन्ट के द्वारा बताएं।

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5/6/16

English बोलना कैसे सीखें How To Learn To Speak English

आप English बोलना क्यों सीखना चाहते हैं?


क्या आप English बोलना सीखना चाहते हैं? क्या आपको लगता है की अगर आप English बोलना जानते तो इससे आपको अपने जीवन में फायदा होता? क्या English न बोल पाने की वजह से आपको काफी नुकसान उठाना पड़ा है? क्या आप से कम deserving होते हुए भी सिर्फ English बोल पाने की वजह से लोग आप से आगे निकल गए हैं? क्या English न बोल पाने की वजह से आपको ignore किया जाता है और English बोलने वालों को आपसे ज्यादा तवज्जो दी जाती है?

यहाँ पर हम सैकड़ों कारण गिना सकते हैं कि आपको English बोलना क्यों आना चाहिए? हो सकता है कि कोई कारण आपको बेवकूफी भरा लगे या कोई कारण आपको बहुत जरूरी लगे जिसकी वजह से आप सोचते हों कि हर किसी को English बोलना सीखना चाहिए।

English सीखने का कोई कारण बड़ा है या छोटा इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। महत्वपूर्ण ये है की जिन कारणों से आप English बोलना चाहते हैं वो आपके लिए कितने जरूरी हैं।

कारण कोई भी हो वो आपके लिए महत्वपूर्ण होना चाहिए। अगर आपके English सीखने का कारण आपके लिए बड़ा और महत्वपूर्ण नहीं है तो आपको English बोलना सीखने में बहुत दिक्कत होगी।

आपके English सीखने के एक या एक से अधिक कारण हो सकते हैं। इन्हें आप अपनी diary में लिख लीजिये। देखिये English बोलना कोइ हप्ते दो हप्ते या महीने दो महीने में तो सीखा नहीं जा सकता। इसमें लम्बा वक्त लगता है। इस लिए आपके जो भी कारण हैं उन्हें लिख लीजिये। हो सकता है की समय के साथ आपके इन कारणों में से कोई अब उतना महत्वपूर्ण ना रह जाये या फिर कोई और महत्वपुर्ण कारण आ जाये तो समय-समय पर आप इसे update करते रहिये।

अब रहा सवाल क्या आप English बोलना सीख सकते हैं?


अगर आप English बोलना सीखना चाहते हैं तो आप जरूर सीख सकते हैं क्योंकि कोई भी English बोलना सीख सकता है। चाहे वो बच्चा हो बुढा हो या जवान हो। मैं तो यहाँ तक कहना चाहूँगा की एक अनपढ़ आदमी भी English बोलना सीख सकता है। क्यों? क्योंकि English एक भाषा है और कोई भी भाषा सीखने के लिए पढ़ा लिखा होने की जरूरत नहीं होती। कोई भी बच्चा स्कूल जाने के पहले अपनी मातृ भाषा बोलने लगता है। तो फिर English बोलना कौन सा असंभव काम हुआ।

इस सवाल का जवाब बहुत आसान है। आप अंग्रेजी बोलना सीख सकते हैं लेकिन आपके English बोलना सीखने का कारण किसी और के लिए हो न हो आपके लिए बड़ा और महत्वपूर्ण होना चाहिए। क्योकि इस कारण की वजह से ही आप लम्बे समय तक English सीखने के लिए प्रयासरत रह पाएंगे।

तो सबसे पहले हम जानते हैं कि English बोलने के लिए हमें क्या मूलभूत चीजें सीखनी होंगी? सिर्फ English ही नहीं कोई भी भाषा सीखने के लिए हमें मूलतः 3 चीजें सिखनी होती हैं

1. शब्द भण्डार Vocabulary

किसी भी भाषा में हम चीजों, भावनाओं और घटनाओं को शब्दों द्वारा व्यक्त करते हैं। शब्दों के बिना भाषा की कल्पना करना असंभव हैं। इसलिए अगर आप English बोलना चाहते हैं तो आपको अपने शब्द भण्डार को बढ़ाना पड़ेगा। शब्दों के महत्व को इस प्रकार से समझ सकते हैं कि जब आप अंग्रेजी में कुछ बोलना चाहते हैं और पाते हैं कि आपको कौन सा शब्द प्रयोग करना चाहिए वो मालूम ही न हो या याद ही न आ रहा हो तो आप अटक जाते हैं।

इसी प्रकार किसी के बोले गए शब्दों का अर्थ न जानने पर आपको उसकी बातें समझ में ही नहीं आएंगी। जब आपको सामने वाला क्या बोल रहा है ये समझ ही नहीं आया तो आप अब उससे क्या बात करेंगे और यदि वह आपसे कोई प्रश्न पूछ रहा है तो आप उसे क्या जवाब देंगे?

कई बार हम context से शब्दों के अर्थ का अंदाज लगा लेते हैं पर कई बार इसमें बड़ी गलती भी हो जाती है।

इतना ही नहीं कई बार सही जानकारी न होने पर एक सामान लगने वाले शब्दों में हम confuse भी हो जाते हैं। क्योंकि इनके अर्थ एकदम भिन्न होते हैं। इसलिए आपको अपना शब्द भण्डार बढ़ाना पड़ेगा क्योंकि शब्द English बोलने के लिए सबसे छोटी इकाई (unit) हैं।

2. वाक्य निर्माण

केवल शब्दों के द्वारा ही किसी भाषा में पूरी बात नहीं कह सकते। अपनी बात या भावनाओं को पूर्ण रूप से व्यक्त करने के लिए शब्दों को सही क्रम में लगाने arrange करने की आवश्यकता होती है। शब्दों को सही क्रम में लगाने से वाक्य बनता है जिससे सही अर्थ निकल कर आता है। वाक्यों का निर्माण करके हम चीजों या घटनाओं के काल, स्थिति आदि को व्यक्त करते हैं।

बहुत से लोग सोचते हैं कि वाक्य निर्माण के लिए व्याकरण grammar की आवश्यकता होती है। पर एक बात याद रखिये किसी भी भाषा के आधार पर उसका व्याकरण बनाया जाता है व्याकरण के आधार पर भाषा नहीं। यही कारण है कि जब आप grammar पढ़ते हैं तो पाते हैं कि उसमे कई rules के एक्सेप्शन्स होते हैं। अगर व्याकरण के आधार पर कोई भाषा बनायी जाती तो एक तो उसका grammar बहुत simple होता और दूसरा rules में एक्सेप्शन्स नहीं होते और तीसरा शायद उस भाषा में कवितायें भी नहीं बनतीं।

तो अंग्रेजी सीखने के लिए जो दूसरा काम आपको करना होगा वो है अपनी वाक्य निर्माण क्षमता को बढ़ाना होगा।

3. शब्द उच्चारण क्षमता Pronunciation

किसी भाषा में हम शब्द जानते हैं वाक्य भी बना लेते हैं, पर जब तक हम इन शब्दों और वाक्यों का सही उच्चारण नहीं कर पाते तब तक हम उसे बोल नहीं सकते। और अगर हम शब्द और वाक्य जानते है और उच्चारण गलत करते हैं तो सामने वाला हमें समझेगा कैसे?

कई ध्वनियाँ जो अंग्रेजी में इस्तेमाल होती हैं वो हिंदी में नहीं होती ऐसे में आपको नयी ध्वनियाँ निकालना सीखना पड़ेगा। आप अपनी मातृ भाषा की ध्वनियों से ही English का शुद्ध उच्चारण नहीं कर सकते।

शब्दों के गलत उच्चारण से कई बार अर्थ का अनर्थ भी हो जाता है। इसलिए अगर आपको English बोलना सीखना है तो आपको शब्दों का सही उच्चारण करना सीखना ही पड़ेगा।

इस post में हमने देखा की आप अंग्रेजी बोलना क्यों सीखना चाहते हैं? क्या आप अंग्रेजी बोलना सीख सकते हैं? और अंग्रेजी बोलने के लिए आपको कौन सी तीन चीजें सीखनी होंगी?

तो इतना पढ़ने के बाद आप जान गए की आप के लिए अंग्रेजी बोलना सीखने के बड़े और महत्वपूर्ण कारण क्या हैं? और आप ये भी जान गए की आप अंग्रेजी बोलना सीख सकते हैं यहाँ तक की एक अनपढ़ आदमी या एक बच्चा भी अंग्रेजी बोलना सीख सकता है। और आपको यह भी पता हो गया कि अंग्रेजी बोलने के लिए आपको अपनी Vocabulary, Sentence Making Ability and Pronunciation क्षमता को बढ़ाना होगा।

इतना जानने के बाद अब आपके सामने challenge है की आप अपनी इन क्षमताओं को बढ़ाएंगे कैसे?

तो इसका जवाब मैं आपको अपनी अगली पोस्ट में दूंगा। अपनी अगली पोस्ट में मैं आपको बताऊंगा कि
  • आप अपने शब्द भण्डार (Vocabulary) को कैसे बढ़ा सकते हैं और कम नए शब्दों को सीख कर भी आपसे अधिक शब्द भण्डार वाले व्यक्ति से भी अच्छी अंग्रजी कैसे बोल सकते हैं।
  • आप अपनी वाक्य निर्माण क्षमता (Sentence Making Ability) कैसे बढ़ा सकते हैं और कोई शब्द मालूम ही ना होने या जल्दी याद ना आने पर भी आप अपनी बात कैसे कह सकते हैं।
  • आप अपने उच्चारण (Pronunciation) को कैसे ठीक कर सकते हैं और अपनी muscles को English Pronunciation के लिए कैसे Train कर सकते हैं ताकि English बोलते समय बार-बार आपकी जबान न फिसले।

जरूर पढ़ें अगला भाग English बोलना कैसे सीखें (कैसे)

अंग्रेजी सीखने के टिप्स के लिए पढ़ें अंग्रेजी बोलना सीखने के बेहतरीन टिप्स


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17/5/16

फेसबुक इतने पैसे कैसे कमाता है? How Does Facebook Earns So Much Money?

फेसबुक इतने पैसे कैसे कमाता है

आज फेसबुक (Facebook) हर कोई परिचित है। Facebook से हम आपस में connect हो सकते हैं और एक दूसरे का हाल-चाल जान सकते हैं। आप समझ सकते हैं कि फेसबुक आपके कितने काम की चीज है।

Facebook के संस्थापक मार्क ज्युकरबर्ग हैं और कंपनी का नाम फेसबुक इंक. है। फेसबुक के वर्तमान समय में 165 करोड़ एक्टिव मासिक users हैं और फेसबुक की कमाई इस तिमाही में 5.4 बिलियन डॉलर यानि ३६ हजार करोड़ रूपये थी।

आप सोच रहे होंगे फेसबुक इतनी कमाई कैसे करती है? वो आखिर क्या बेचती है जिससे उसे इतनी कमाई होती है?

दोस्तों कोई भी कंपनी दो प्रकार से कमाई कर सकती है। सेवाएँ services देकर या उत्पाद products बेचकर। Facebook हमें सेवाएँ देती है यानि की हम Facebook services use करते हैं। तो क्या हम उसके ग्राहक हैं? किन्तु हम Facebook को कोई पैसा नहीं देते तो फिर हम उसके customer कैसे हुए?

असल में फेसबुक के ग्राहक उसके प्रचारक (advertisers) हैं, और फेसबुक के users उसके लिए उसके उत्पाद यानिकि product हैं, जिसे वह अपने प्रचारकों advertisers को बेचती है।

दरअसल Facebook के पास अपने users की बहुत सी जानकारियाँ रहती हैं जिसके आधार पर कॅम्पनियां targeted advertising कर सकती हैं। इस प्रकार के प्रचार में कॅम्पनियों के प्रोडक्ट्स जिनके लिए होते हैं उन्ही को target करके add दिखाया जाता है अन्य लोगों को नहीं।

आप जो भी जानकारी फेसबुक पर share करते हैं वो Facebook के रिकॉर्ड में रहती है। इससे फेसबुक आपके बारे में बहुत सी बातें जान जाता है।

Facebook आपके बारे में क्या-क्या जान सकता है?

  • आप कितना और कहाँ से पढ़े हैं?
  • आपके परिवार में और कौन कौन हैं?
  • आपके मित्र कौन हैं?
  • आपकी उम्र कितनी है?
  • आप कहाँ घूमने जाते हैं?
  • आप कहाँ रहते है?
  • आप किस पार्टी के समर्थक हैं?
  • आप किस नेता के समर्थक हैं?
  • आप कहाँ काम करते हैं?
  • आप ऑफिस कब जाते हैं?
  • आप घर वापस कब आते हैं?
  • आप किस रेस्तरां में खाना पसंद करते हैं?
  • आप किस-किस देश की यात्रा पर गए थे?
  • आपकी marriage anniversary कब है?
  • आप honeymoon मनाने कहाँ गए थे?
  • आप कौन सा मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हैं?
  • आपका phone no और mobile नंबर क्या है?
  • आपने कौन सा नया सामान जैसे घर, मोबाइल या कार खरीदी है?
  • Facebook आपके फोटो को पहचान सकता है तब भी जब आपकी फोटो पीछे से ली गयी हो।

और तो और जो बातें आप स्वयं अपने बारे में नहीं जानते, वो भी Facebook को पता चल जाती हैं जैसे आपके stalker on Facebook कौन हैं?

सबसे बड़ी बात इसमें से ज्यादातर जानकारियाँ आप स्वयं फेसबुक को देते हैं, और बची-खुची कसर आपके Facebook friends पूरी कर देते हैं।

Facebook आपकी जानकारी कैसे एकत्र करता है?

  • आपके profile से
  • आपके द्वारा share किये गए फोटो और अन्य पोस्ट्स से
  • आपको tag किये गए फोटो से
  • आपके द्वारा किये गए कमेंट से
  • आपके पोस्ट पर अन्य लोगों द्वारा किये गए कमेंट्स से
  • आपके चैट से
  • आपके द्वारा लाइक किये गए posts से
  • आपके द्वारा पढ़े गए न्यूज़ और articles से
  • facebook इस्तेमाल करने के लिए आपके द्वारा use किये गए devices जैसे मोबाइल, लैपटॉप, tablets से
  • आपके द्वारा join किये गए groups से

Facebook आपकी इन सब जानकारियों को एकत्र कर आपको एक उत्पाद बना देता है। और फिर इस जानकारी से प्रचारकों (advertisers) को अपने platform पर प्रचार (advertise) करने के लिए लुभाता है।

प्रचार करना कोई नयी बात नहीं है। ये सिलसिला सैकड़ों बल्कि हजारों वर्षों से चल रहा है। केवल प्रचार के नये-नये माध्यम निकलते रहते हैं। प्रचार करने के लिए अखबार, पत्रिकाएं, रेडियो, टेलीविज़न आदि साधन तो पहले से ही मौजूद हैं इनमे एक नया माध्यम internet भी जुड़ गया है।

प्रचार के प्रत्येक माध्यम की अलग अलग विशेषताएं होती हैं जो अलग-अलग प्रकार के उत्पादों के प्रचार के लिए उपयुक्त suitable हैं।

हर प्रचारक चाहता है की अपने उत्पाद का प्रचार वह उन्ही लोगों को करे जिसको वह अपना product बेचना चाहता है। और इसी के आधार पर वह प्रचार का माध्यम चुनता है जिससे प्रचार का खर्च कम हो और प्रभाव impact अधिकतम हो।

और इसी लिए advertisers फेसबुक को इतना पसंद करते हैं क्योंकि वो आपके gender, age, location और सबसे बड़ी बात आपके interest के हिसाब से प्रचार दिखा सकते हैं।

फेसबुक के जाने अनजाने आप पर क्या बुरे प्रभाव पड़ सकते हैं जानने के लिए जरूर पढ़ें फेसबुक के आप पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव


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1/4/16

ज्ञान और शिक्षा पर चाणक्य के अनमोल विचार Chanakya Quotes on Knowledge and Education

आचार्य चाणक्य के अनमोल विचार
आचार्य चाणक्य

ज्ञान और शिक्षा को भारत देश ने हजारो वर्षों से बहुत महत्व दिया है, इस पर आचार्य चाणक्य के कुछ अनमोल विचार (Chanakya Quotes in Sanskrit and Hindi) यहाँ प्रस्तुत हैं।

यस्मिन देशे न सम्मानो न वृत्तिर्न च बान्धवाः।
न च विद्यागमः कश्चित् तं देशं परिवर्ज्येत्।।
जिस देश में सम्मान, आजीविका का साधन, मित्र रिश्तेदार और विद्या अर्जित करने के साधन न हों ऐसे देश को छोड़ देना चाहिए।

विषादप्यमृतं ग्राह्य्ममेध्यादपि काञ्चनम्।
निचादप्युत्तमा विद्या स्त्रीरत्नं दुष्कुलादपि।।
विष में यदि अमृत हो, गन्दगी में यदि सोना हो, नीच मनुष्य के पास कोई विद्या हो और दुष्ट कुल में अच्छी स्त्री हो तो उन्हें ग्रहण कर लेना चाहिए।

माता शत्रुः पिता वैरी येन बालो न पाठितः।
न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये बको यथा।।
अपने बच्चों को न पढ़ाने वाले माता-पिता उनके शत्रु के सामान हैं। क्योंकि अनपढ़ मनुष्य किसी सभा में उसी प्रकार अशोभनीय होते हैं जैसे हंसों के झुंड में बगुला।

श्लोकेन वा तदधेन पादेनैकाक्षरेन वा।
अबंध्यं दिवसं कुर्याद् दानाध्ययन कर्मभिः।।
व्यक्ति को एक श्लोक, एक श्लोक ना हो सके तो आधे श्लोक का ही या जितना हो सके उतना ही अध्यययन करना चाहिए। व्यक्ति को ज्ञान अर्जित करते हुए अपने दिन को सार्थक बनाना चाहिए।

कामधेनुगुणा विद्या ह्यकाले फलदायिनी।
प्रवासे मातृसदृशी विद्यागुप्तं धनं स्मृतम।।
विद्या में कामधेनु के गुण होते हैं जो असमय ही फल देते हैं। विदेश में विद्या माँ के सामान है इसलिए इसे गुप्त धन कहा गया है।

जनिता चोपनेता च यस्तु विद्यां प्रयच्छति।
अन्नदाता भयत्राता पञ्चैते पितरः स्मृता।।
जन्म देने वाला, आध्यात्मिकता से परिचय कराने वाला, विद्या देने वाला, अन्न देने वाला तथा भय से मुक्ति देने वाला ये पांच व्यक्ति पितर माने गए हैं।

वित्तेन रक्ष्यते धर्मो विद्या योगेन रक्ष्यते।
मृदुना रक्ष्यते भापः सत्स्त्रिया रक्ष्यते गृहम।।
धर्म की रक्षा धन से, विद्या की रक्षा योग से, राजा की रक्षा मृदुता से और घर की रक्षा अच्छी स्त्रियों से होती है।

विद्या मित्रं प्रवासेषु भार्या मित्रं गृहेषु च।
व्याधितस्यौषधं मित्रं धर्मो मित्रं मृतस्य च।।
विदेश में विद्या, घर में पत्नी, रोग में दवा और मरे हुए का धर्म ही उसके मित्र हैं।

धन-धान्यप्रयोगेषु विद्यासंग्रहणेषु च।
आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्।।
पैसे के लेंन-देन में, विद्या ग्रहण करने में, भोजन करने में और व्यवहार करने में जो शर्म नहीं करता वह सुखी रहता है।

संतोषस्त्रिषु कर्तव्यः स्वदारे भोजने धने।
त्रिषु चैव न कर्तव्योऽध्ययने तपदनायोः।।
स्त्री, भोजन और धन इन तीनो का संतोष करना चाहिए किन्तु विद्या अध्ययन, तप और दान का संतोष नहीं करना चाहिए।

शुनः पुच्छमिव व्यर्थं जीवितं विद्या विना।
न गृह्यगोपने शक्तं न च दंशनिवारणे।।
विद्या के बिना मनुष्य का जीवन कुत्ते की उस पूँछ के सामान है जिससे ना तो वह अपने मल द्वार को ही ढक सकता है और न ही खुद को काटने वाले कीड़ों को ही भगा सकता है।

क्रोधो वैवस्वतो रजा तृष्णा वैतरणी नदी।
विद्या कामदुधा धेनुः संतोषो नन्दनं वनम्।।
क्रोध यमराज, तृष्णा वैतरणी, विद्या कामधेनु और संतोष नन्दन वन के सामान है।


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28/3/16

हम सब विकलांग हैं

3 December का दिन International Day of People with Disability (IDPwD) विकलांग लोगों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है।

३ दिसम्बर २०१५ को मैं चंदौली जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी के ऑफिस में गया था। वहाँ पर Children With Special Needs (CWSN) चिल्ड्रेन विथ स्पेशल नीड्स बच्चों के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं जैसे कुर्सी दौड़, रस्सी खींच आदि आयोजित की गयी थीं।

ये बच्चे अलग-अलग प्रकार की शारीरिक अक्षमताओं के शिकार थे पर वे लगभग हर वो काम कर में सक्षम थे जो एक सामान्य बच्चा कर सकता है। जैसे की मूक और बधिर बच्चे आसानी से कम्यूनिकेट कर रहे थे। हालांकि मैं उनकी भाषा नहीं समझता पर वे बड़ी आसानी से आपस में और अपने शिक्षकों से बातें कर ले रहे थे।

हम सबने अपने बचपन में कुर्सी दौड़ खेला है। यह खेल कैसे खेला जाता है? इसमें एक गाना बजता है और बच्चे कुर्सियों के चारों ओर दौड़ते हैं। जैसे ही ये गाना बंद होता है बच्चे खाली कुर्सियों पर बैठ जाते हैं। अब क्योंकि कुर्सियों की संख्या बच्चों की संख्या से काम होती है इसलिए कुछ बच्चों को बैठने के लिए कुर्सियां नहीं मिलती और वे इस दौड़ से बहार हो जाते हैं।

अब यही खेल जब मूक एवं बधिर बच्चे खेल रहे थे तो क्योंकि वे सुन नहीं सकते इसलिए उनके लिए एक रूमाल लहराया जाता था, जैसे ही ये रूमाल लहराना बंद होता, बच्चे तुरंत कुर्सी की ओर दौड़ पड़ते।

इसी प्रकार हर विकलांग बच्चा किसी ना किसी प्रकार से लगभग सारे वे काम जो एक सामान्य बच्चा कर सकता है कर लेते हैं। जैसे अंधे बच्चे किताबें पढ़ लेते हैं, हालांकि वे इन्हें देखकर नहीं बल्कि छूकर पढ़ते हैं।

अब जरा सोचिये अगर कोई अँधा व्यक्ति ये सोच ले की मैं तो पढ़ ही नहीं सकता क्योंकि किताबों में लिखा मैं कैसे देखूंगा तो आप तो कहेंगे इसे कुछ नहीं मालूम। पर हम सब इसी प्रकार की किसी ना किसी कमी के शिकार हैं और बैठे- बैठे ये सोचते रहते हैं की काश ये कमी मुझमे ना होती तो मैं सारे काम कर लेता।

इस संसार में हर कोई किसी ना किसी प्रकार की दृश्य या अदृश्य विकलांगता का शिकार है। इसी प्रकार इस संसार में हर कोई किसी ना किसी प्रकार के दृश्य या अदृश्य वरदान का धारक है। हमें अपनी इन विकलांगताओं और वरदानों को पहचानना आना चाहिये।

हर काम को करने के कुछ जाने माने तरीके होते हैं और हम नए तरीकों के बारे में सोचते ही नहीं। यही हमारी विकलांगता है। क्योंकि हमने जो मान्यताएं बना ली हैं हम उनसे बंध जाते हैं और उन मान्यताओं को परखते नहीं। हम कोई नया रास्ता ढूँढते ही नहीं और हार मान लेते हैं।

हमें विकलांगताओं के दुष्प्रभावों को कम या समाप्त करने के उपाय ढूँढने चाहिए। और अपने वरदानों का फायदा उठाना चाहिए।

 

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15/3/16

परीक्षा सिर पर है अब पढ़ाई कैसे करें

अपनी एक पोस्ट परीक्षा में सफलता के रहस्य में मैंने परीक्षा में सफलता के लिए पढ़ाई कैसे करें इसकी जानकारी दी थी। जिसमें मैंने समय के सदुपयोग और अलग-अलग तरीकों से तैयारी करने के बारे में बताया था।

अब इस पोस्ट में जब परीक्षा एकदम पास हो तब तैयारी कैसे करें इस विषय पर कुछ तरीके मैं बताना चाहता हूँ। क्योंकि जब आपका सत्र शुरू होता है तो अलग तरीके से पढ़ाई की जाती है जबकि परीक्षा पास आने पर पढ़ाई का तरीका बदल जाता है।

Don’t Lose Hope लगे रहें

जब परीक्षा सर पर हो तो भी हमें हार नहीं माननी चाहिए। भले ही आपने पूरे सत्र में अच्छे से पढाई ना की हो पर अब भी आपके पास सफल होने का अवसर है और इस अवसर का पूरा उपयोग करें। हो सकता है की आपने परीक्षा के लिए जो लक्ष्य बनाया हो अब आपको लगता हो की आप उसे प्राप्त नहीं कर पायेंगे पर उम्मीद छोड़ देने से बेहतर है कि आप लगे रहें। क्योंकि तभी आप निराश होकर मेहनत छोड़ देने की तुलना में बेहतर परिणाम प्राप्त कर पायेंगे और हो सकता है की आप अपने लक्ष्य को भी प्राप्त कर सकें।

अक्सर जब हम निराश होते हैं तो हम हर बात में बुरी से बुरी स्थिति (Worst Case Scenario) के बारे में सोचते हैं जैसे की प्रश्नपत्र कठिन आएगा, मैं भूल जाऊँगा, समय काम पड़ जाएगा। पर यह सब आपको तब तक नहीं पता चल सकता जब तक आप परीक्षा दे नहीं लेते। क्योंकि हो सकता है की इस साल प्रश्नपत्र बहुत सरल हो या आपने जो पढ़ा हो वही आए। ये आप पहले से नहीं जानते इसलिए चिंता छोड़ें और लगे रहें।

परीक्षा के प्रारूप का सम्मान करें Respect Examination Format

यदि कोई खिलाड़ी मरथान दौड़ की तैयारी करता है और यदि उसे १०० मीटर की दौड़ में दौड़ाया जाय तो वह भले ही यह दौड़ पूरी कर ले पर उसके जीतने की संभावना नहीं है। इसी प्रकार यदि कोई खिलाडी १०० मीटर की दौड़ की तैयारी करता है और उसे मैराथन में दौड़ाया जाय तो जीतना तो छोडिये वह शायद मैराथन पूरा भी नहीं कर पायेगा। हाँ शुरू में उसे भले लगे कि वह सबसे तेज और सबसे आगे दौड़ रहा है तो वही जीतेगा, परन्तु कुछ किलोमीटर के बाद स्थितियाँ बदल जाएँगी।

कहने का मतलब है कि आप जो परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं उसका एक प्रारूप Format है जिसके अनुसार आपको तैयारी करनी पड़ती है। जैसे कि परीक्षा में प्रश्न का प्रकार बहुविकल्पीय (Objective) है या विवेचनात्मक (Subjective) है, परीक्षा के लिए निर्धारित सिलेबस क्या है? उदहारण के लिए आप किसी विषय पर ५०००० शब्दों का निबंध लिख सकते हैं परन्तु आपकी परीक्षा ३ घंटे की है और जो निबंध लिखना है वो १०० में से मात्र १५ अंकों का है। अब आप ५०००० शब्दों का निबंध लिखने बैठेंगे तो ना तो निबंध ही पूरा लिख पाएंगे ना तो परीक्षा उत्तीर्ण ही कर पायेंगे।

परिणाम पर ध्यान केन्द्रित करें Focus On Results

जब आप कक्षा में पढ़ाई करते हैं तो आपका ध्यान ज्ञान अर्जित करने पर होता है पर जब आप परीक्षा के समय तैयारी करते हैं तो ज्ञान के साथ-साथ परिणाम भी महत्वपूर्ण हो जाता है। जैसे की भले ही आपको बहुर सारा ज्ञान है पर यदि वह परीक्षा में पूछा ही ना जाय या आप उसे उत्तर पुस्तिका में सही ढंग से लिख ही ना पायें तो परीक्षा में अच्छे परिणाम नहीं मिल सकते।

Take Help मदद लें

परीक्षा में सफलता के लिए आपको परिवार के लोगों, शिक्षकों एवं अन्य लोगों से मदद लेने से भी नहीं चूकना चाहिए। यह मदद आप पढ़ाई के अलावा अन्य कार्यों में भी ले सकते हैं जिससे आपका समय बचे।

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16/11/15

आपनी धारणाओं को परखें Challenge Your Assumptions

यह बात विश्वकर्मा पूजा के दिन अर्थात १७ सितम्बर २०१५ की है। सुबह करीब ९ बजे अपना रेडिओ बनवाने के लिए मैं बाज़ार गया। रेडिओ बनाने के लिए जिस दुकान को मैं जानता था वो बंद थी। मुझे कुछ और सामान भी खरीदना था इसलिए मैं सामान खरीदने मार्केट में और आगे चला गया।

अचानक मुझे इलेक्ट्रॉनिक्स की एक दुकान दिखाई दी। मैंने सोचा शायद यहाँ पर रेडिओ बनता हो इसलिए मैं दुकान पर गया और पूछा क्या आप रेडियो बनाते हैं? दुकानदार ने कहा नहीं। मैंने पूछा तो आस-पास कोई दुकान बता सकते हो जहाँ रेडियो बनता हो?

उस दुकान पर दो अन्य लोग भी खड़े थे। मेरी अज्ञानता पर उन्हें हँसी आ रही थी। दोनों एक साथ ही बोल पड़े तुम्हारा रेडियो कहीं नहीं बनेगा। क्या तुम जानते नहीं हो आज विश्वकर्मा पूजा है? आगे कई दुकाने हैं जहाँ रेडियो बनता है परन्तु आज कोई भी तुम्हारा रेडियो नहीं बनाएगा। मैंने कहा पर दुकाने तो खुली हैं। इस पर एक ने कहा “दुकानदारों पर यह लागू नहीं होता, उन्हें तो सामान बेचना होता है पर आज कोई भी मिस्त्री काम नहीं करेगा”। मैंने कहा मुझे मालूम है। “मालूम है तो ऐसा बेवकूफी भरा काम ही क्यों करते हो” तुरंत जबाब आया।

मैं उन्हें बताना चाहता था की मैं एक इंजिनियर हूँ और विश्वकर्मा पूजा के बारे में जानता हूँ। पर उसमे से एक आदमी के मुह से शराब की बदबू आ रही थी। मुझे १० बजे वापस घर भी पहुँचना था। मुझे मालूम था की अगर मैं इनसे बहस करूंगा तो कई घंटे यहीं बीत जायेंगे इसलिए मैं वहाँ से चुपचाप निकल गया।

वापस आते समय मैंने देखा की जिस दुकान पर मैं पहले जाना चाहता उसका शटर खुला था और दुकान वाला लड़का बाहर झाड़ू लगा रहा था।

मैंने अपनी बाइक रोकी और उसके पास जाकर बोला मेरा रेडिओ बिगड़ गया है, बनवाना था। उसने पूछा क्या दिक्कत आ रही है? मैंने उसे रेडियो में आने वाली दिक्कतों के बारे में बताया। उसने कहा आज तो विश्वकर्मा पूजा है कोई भी मिस्त्री काम नहीं करेगा। आप अपना रेडियो दे दीजिये कल बन जायेगा। कल आकर ले लीजिये। मैंने उसे रेडियो दे दिया और घर आ गया।

मित्रों दुकान पर खड़े लोगों ने क्या-क्या धारणायें (Assumptions) बना ली थी जरा देखिये

1. मुझे रेडियो आज ही बनवाना था।

2. मुझे विश्वकर्मा पूजा के बारे में मालूम नहीं था।

3. दुकानदार रेडिओ ले कर रख नहीं सकता था।

लेकिन उनकी ये तीनों ही धारणायें गलत थीं।

हम धारणायें कैसे बनाते हैं इसके कुछ उदाहरण देखते हैं

देखकर

किसी ने मैले और फटे कपड़े पहने हैं तो वह गरीब होगा।

कोई महँगी गाड़ी से उतर रहा है तो वह अमीर होगा।

सुनकर

कोई अंग्रेजी बोल रहा है तो वह पढ़ा-लिखा होगा।

कोई देशी भाषा बोल रहा है तो वह अनपढ़ होगा।

दूसरों की बातों से

किसी की सब बुराई कर रहे हैं तो वो बुरा होगा।

किसी की सब बड़ाई कर रहे हैं तो वो अच्छा होगा।

अपने अनुभवों से

किसी के साथ हमारा अनुभव अच्छा नहीं रहा तो वो बुरा होगा।

किसी के साथ हमारी अच्छी मित्रता है तो वो अच्छा होगा।

१०वीं की गणित और विज्ञान आसान है तो ११वीं और १२वीं की भी होगी।

सोचकर

अपने आप ही कुछ सोच कर भी हम धारणायें बना लेते हैं जैसे

यह काम मुझसे नहीं होगा।

कोई मेरी मदद नहीं करेगा।

सब मेरी मदद करेंगे।

मैं परीक्षा में सफल नहीं हो सकता।

यह विषय बहुत आसान है।

यह विषय बहुत कठिन है।

अन्य हजारों तरीकों से

किसी के नाम से उसके स्त्री या पुरुष होने का।

किसी की जात से उसके पेशे का।

किसी के सरनेम से उसके धर्म या क्षेत्र का।

किसी के रंग रूप से उसके क्षेत्र या देश का।

कोई चीज भारी है तो वह मजबूत होगी।

कोई चीज महँगी है तो वो अच्छी होगी।

यह तो बहुत ही छोटी सी लिस्ट है इसी प्रकार की हजारों धारणायें हम रोज बनाते हैं। जिसमें से अधिकतर सही होती हैं पर कुछ गलत भी होती हैं।

मित्रों इससे आप यह सोच रहे होंगे कि हमें कोई भी धारणा नहीं बनानी चाहिए पर ऐसा नहीं है

धारणा एक ज़रूरी बुराई है।

Assumption is a necessary evil.

हमें हर समय धारणायें बनानी पड़ती हैं क्योकि

हमें हमेशा संपूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं होती इसलिए हम चीजों को मान (Assume) कर के चलते हैं।

इसी प्रकार तुरंत निर्णय लेने में भी धारणायें बहुत मददगार होती हैं।

इसीलिए मित्रों धारणायें बनाना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि जानकारी के अभाव में ये हमें एक दिशा देता है। परन्तु हमें अपनी धारणाओं को समय-समय पर परखते रहना चाहिए क्योंकि किसी धारणा के आधार पर जब हम कोई निर्णय ले लेते हैं या कोई कार्य करते हैं और अगर वह धारणा ही गलत निकलती है तो हमारा निर्णय भी गलत हो जाता है और हमारे कार्य के उल्टे परिणाम निकलते हैं।

धारणाओं को कैसे परखें

अधिक से अधिक जानकारी जुटाकर हम अपनी धारणाओं को नए ज्ञान की कसौटी पर परख सकते हैं।

प्रश्न पूछकर भी हम लोगों के बारे में अपनी धारणाओं को परख सकते हैं।

अंत में मित्रों मैं बस इतना ही कहना चाहता हूँ कोई भी निर्णय लेने या कार्य शुरू करने के पहले अपनी उन धारणाओं को जितना हो सके परख लें जिनके आधार पर आप कोई निर्णय ले रहें हैं या कार्य शुरू कर रहे हैं। अच्छा होगा अगर आप उन धारणाओं को यानि जो आप मान कर चल रहे हैं उन्हें लिख लें। इसी प्रकार कार्य शुरू हो जाने के बाद भी समय-समय पर अपनी धारणाओं को उनके महत्व के आधार पर परखें।

 

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23/10/15

परीक्षा में सफलता के रहष्य जानकर दूसरों से आगे बढ़ें

परीक्षा में सफल होने के लिए कठिन परिश्रम (Hard Work) और स्मार्ट वर्क (Smart Work) दोनों की आवश्यकता होती है। यदि आप सिर्फ कठिन परिश्रम करते हैं तो आपको पढाई के लिए अत्याधिक समय देना पड़ेगा और हो सकता है कि पढाई के अलावा आप अन्य चीजों में पिछड़ जाएँ।

यदि आप सिर्फ स्मार्ट वर्क करते हैं तो आप बहुत अधिक अंक प्राप्त नहीं कर पाएंगे और हो सकता है की परीक्षा में आपके साथ धोखा हो जाय।

इसलिए परीक्षा में अपार सफलता के लिए hard work और smart work का combination बहुत जरूरी है। इस लेख में मैं आपको कुछ ऐसे ही टिप्स देने वाला हूँ जो इन दोनों प्रकार के तरीकों का प्रयोग कर परीक्षा में आपको अपार सफलता दिलाएँगे।

समय का सदुपयोग करें

आपका समय बहुमूल्य है इसे व्यर्थ न गवाएं।

मनुष्य के पास समय सिमित होता है और जो चीज सिमित होती है उसका मूल्य बहुत अधिक होता है। हर एक छात्र के पास प्रतिदिन सामान समय २४ घंटे होते हैं। अब उसी सामान समय में कोई टॉप करता है और कोई फेल हो जाता है। तो फिर समय सामान होते हुए भी एक सफल विद्यार्थी और एक असफल विद्यार्थी में क्या अंतर होता है?

मनुष्य के पास सदा से ही अपने समय को व्यतीत करने के तमाम साधन रहे हैं। आज शायद कुछ ज्यादा ही हैं जैसे आज के छात्र के पास TV, लैपटॉप, स्मार्ट फोन, अखबार इत्यादि समय बर्बाद करने के साधन हैं। इन समय बर्बाद करने वाले साधनों का उपयोग कम कर आप उस समय का सदुपयोग पढाई के लिए कर सकते हैं। अर्थात आप अपने पढाई का समय बढ़ा कर सफलता की ओर बढ़ सकते हैं। आप तय कर लीजिए की आपको कितने घंटे पढना है और इन चीजों का समय काम कर के पढाई में लगाइए।

समय के सदुपयोग का स्मार्ट तरीका है कि आप अपनी कक्षा के समय का पूरा उपयोग करें। जब शिक्षक कक्षा में पढ़ाते हैं तो कई छात्र आपस में बातें करने में या इधर उधर करने में क्या पढ़ाया जा रहा है उस पर ध्यान नहीं देते। यह भी समय का दुरुपयोग है। जब शिक्षक कक्षा में पढ़ा रहे हैं तो उसे ध्यान से समझिए और जो समझ में ना आये उसे तुरंत पूछिए। कई छात्र कुछ समझ में ना आने पर संकोचवश उसे शिक्षकों से पूछते नहीं हैं। स्मार्ट का एक अर्थ बेशर्म भी होता है इसलिए याद रखें

जिसने की शर्म उसके फूटे कर्म।

इसलिए स्मार्ट बनिए यानिकी कक्षा का कक्षा में ही समझिए और जो न समझ आए बेशर्मी से पूछिए।

लगातार आगे बढ़ते रहें

कछुए और खरगोश की कहानी तो आपने सुनी होगी। इस कहानी में कछुआ भले ही धीरे-धीरे लेकिन लगातार आगे बढ़ता रहता है जबकि खरगोश तेजी से दौड़कर थक जाता है और फिर रुक जाता है आराम करने के लिए। और जब वह आराम करके उठता है तो कछुआ जीत चुका होता है। हालांकि यह एक काल्पनिक कहानी है लेकिन वास्तविक जीवन में भी सत्य है।

उदाहरण के लिए कभी आपने मैरॅाथन धावकों को देखा है, वो धीरे-धीरे ही सही लेकिन लगातार दौड़ते रहते हैं और केवल अंतिम १०० या २०० मीटर तेज दौड़ते हैं।

परीक्षा में सफलता के लिए भी ठीक यही strategy काम आती है। आप अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे ही सही पर लगातार आगे बढ़ते रहें। कई छात्रों की आदत होती है कि वे प्रतिदिन तो नहीं पढ़ते पर टेस्ट या एग्जामिनेशन के पहले टाइम टेबल बना कर बहुत अधिक मेहनत करने की कोशिश करते हैं। और परिणाम हमेशा साधारण मिलता है। और एक विषय के टेस्ट में अगर वे सफल हो भी जाएँ तो भी इसकी वजह से अन्य विषयों की पढाई अस्त-व्यस्त हो जाती है, उनका सोना, खाना-पीना या अन्य काम अस्त-व्यस्त हो जाते हैं। परीक्षा में अपार सफलता प्राप्त करना किसी भी प्रकार से टेंशन की बात नहीं होनी चाहिए और यदि हर बार परीक्षा या टेस्ट आपके लिए टेंशन भरा होता है तो आप खरगोश की तरह दौड़ रहे हैं कछुए की तरह नहीं।

किसी भी कक्षा या विषय का सिलेबस बहुत सोच समझ कर बनाया जता है। और इसको पूरा करने का समय भी एक सामान्य (Average) छात्र के हिसाब से होता है। आपको थोड़ा कम या ज्यादा समय लग सकता है पर यह अंतर (Variation) बहुत अधिक नहीं होता। इसका मतलब अगर आप लगातार आगे बढ़ते रहते हैं तो सिलेबस पूरा करना आपके लिए किसी भी प्रकार से बोझ नहीं हो सकता।

परीक्षा का डर निकालिए

अगर आपको परीक्षा से बहुत डर लगता है। परीक्षा का नाम सुनते ही आपकी हालत खराब हो जाती है और आप टेंशन में आ जाते हैं, आते हुए उत्तर भी भूल जाते हैं या फिर समय ही नहीं बचता उन उत्तरों को लिखने के लिए। तो आपकी सारी मेहनत बर्बाद हो जाती है और यह बहुत ही दुखद है।

इसका कारण यदि विषय की पर्याप्त तैयारी का ना होना है तो इसका उपाय लगातार आगे बढ़ते रहना ही है। और यदि यह जेनुइन डर है तो इसका उपाय है की आप इस डर से लड़िए और इसे जीत लीजिए।

मित्रों डर के विषय में चाणक्य ने कहा है

“भय को पास न आने दो और जैसे ही वो पास आए उसपर आक्रमण कर उसे समाप्त कर दो।”

“As soon as the fear approaches near, attack and destroy it.”

अर्थात् परीक्षा के डर को निकालना है तो आप बार-बार परीक्षा दीजिए। परीक्षा की तयारी के लिए आप ज्यादा से ज्यादा मॉडल पेपर हल करें। इससे आपको उस विषय की परीक्षा का अभ्यास हो जाएगा और आप वास्तविक परीक्षा में होने वाली घबराहट और इस घबराहट से होने वाले नुकसान से बच जायेंगे।

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18/10/15

आवश्यक की आवश्यकता Importance Of Important In Hindi

Importance of Important
आवश्यक (Important) एक तुलनात्मक (Relative) शब्द है, अर्थात् हम यदि किसी कार्य को आवश्यक कहते हैं तो इसका मतलब है कि इस कार्य पर अन्य कार्यों की तुलना में अधिक ध्यान देना चाहिए और कोई काम यदि अत्यावश्यक है तो उसपर हमें आवश्यक कार्यों की तुलना में भी अधिक ध्यान देना चाहिए। इसी प्रकार यदि कोई कार्य आवश्यक नहीं है तो इसका मतलब है की उसपर आवश्यक एवं अत्यावश्यक कार्यों की तुलना में काम ध्यान देना चाहिए।

कार्यों की आवश्यकता भी समय के साथ बदलती रहती है। आज जो आवश्यक कार्य है कल वह अत्यावश्यक बन सकता है या फिर अनावश्यक भी बन सकता है। इसी प्रकार आज का अनावश्यक कार्य कल को अत्यावश्यक बन सकता है। उदाहरण के लिए यदि आप किसी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो परीक्षा के दिन तक परीक्षा की तैयारी करना आवश्यक है पर जब परीक्षा का समय आता है तो परीक्षा की तैयारी अनावश्यक हो जाती है और परीक्षा देना अत्यावश्यक हो जाता है।

सफलता की राह में एक रोड़ा यह भी है की लोग हर कार्य को आवश्यक बना लेते हैं। याद रखिये यदि आपका हर कार्य आवश्यक है तो फिर आवश्यक शब्द का कोई मतलब नहीं रह जाता क्योंकि तब हम हर कार्य को अत्यावश्यक या अनावश्यक भी कह सकते हैं। याद रखें

यदि हर चीज आवश्यक है तो फिर कुछ भी आवश्यक नहीं है।

If everything is important then nothing is important.

इसलिए प्रतिदिन के कार्यों को अत्यावश्यक आवश्यक और अनावश्यक कार्यों में बाँट कर करना चाहिए। आवश्यक और अनावश्यक चीजों का निर्णय करना भी सफलता के लिए बहुत जरूरी हो जाता है। यदि आप किसी समय में क्या आवश्यक है और क्या अनावश्यक है इसका निर्णय करने में दक्ष हैं तो आपकी सफलता कुछ हद तक सुनिश्चित मान सकते हैं।

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5/10/15

सफलता के मूल मंत्र

मित्रों सफलता कोई ऐसी वस्तु नहीं है जो तुरंत प्राप्त की जा सके। यह एक सतत प्रक्रिया होती है जिसके लिए हमें निरंतर सही दिशा में प्रयास करने पड़ते हैं। सफलता की सीढियां चढ़ कर हम अचानक ऊपर नहीं पहुँच जाते बल्कि इसके लिए हमें एक एक पायदान चढ़ना होता है।

सफलता के स्वप्न तो हर कोई देखता है, पर सफलता के लिए जो सतत प्रयास करने पड़ते हैं वो कोई नहीं करना चाहता और परिणाम स्वरुप असफलता ही उनके हाथ लगाती है। फिर लोग अपने भाग्य को कोसना शुरू कर देते हैं और सफल लोगों के भाग्य से जलने लगते हैं। मित्रों यदि भाग्य होता है तो आप कोई भी चेष्टा ही क्यों करते हैं? जैसे कि आप भूख लगने पर खाना क्यों खाते हैं? यदि आपके भाग्य में होगा तो आपका पेट स्वयं भर जाएगा। चलिए मान लेते हैं कि भाग्य होता है और भाग्य में जो लिखा होता है उसे कोई नहीं बदल सकता। तो फिर सवाल उठता है कि क्या आप जानते हैं की आपके भाग्य में क्या लिखा है? इसका जवाब है नहीं।

मित्रों भाग्य का होना या ना होना उतना बड़ा सवाल नहीं है। सवाल है कि हम क्या बदल सकते हैं और क्या नहीं? जो चीजें हम नहीं बदल सकते उनके विषय में चिंता करके क्यों हम अपना ब्लड प्रेशर (blood pressure) बढ़ाएं?
हमें सिर्फ़ उन चीजों पर ध्यान केन्द्रित(focus) करना चाहिए जिन्हें हम बदल सकते हैं।
We should focus on things we can change.
सफलता की राह में हमारी दो अड़चने हैं।

पहला हम उन चीजों का रोना रोते हैं जिन्हें हम बदल नहीं सकते। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है बीता हुआ समय। मित्रों बीते हुए समय का रोना रोते हुए बहुत से लोगों को आपने सुना होगा अब सवाल यह उठता है की बीते समय की घटनाओं को क्या हम बदल सकते हैं? यदि नहीं तो बीते दिनों पर आपना समय न व्यर्थ गवाँए और आगे बढ़ जायें। इसी प्रकार हम दूसरों को बदलने की कोशिश में भी अपना समय गँवा देते हैं जबकि हमें अपने आप को बदलने का प्रयास करना चाहिए।

दूसरा हम उन चीजों को भी अपरिवर्तनीय मान लेते हैं जिन्हें हम बदल सकते हैं। जैसे कि हमारी बुरी आदतें। मित्रों बुरी आदतों को अच्छी आदतों से बदलना आपको सफलता के करीब ले जायेगा।

यदि आप हर बार क्या बदल सकते हैं और क्या नहीं इसकी सही पहचान कर सकें और जिसे बदल सकते हैं उसी पर focus करें तो आपकी सफलता की राह आसान हो जायेगी।

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12/9/15

पैसे पेड़ पर उगते हैं Money Grows On Trees

मित्रों अक्सर आपने लोगों को ये कहते हुए सुना होगा की क्या पैसे पेड़ पर उगते हैं (Does money grows on trees)? तो इसका उत्तर है हाँ पैसे पेड़ पर उगते हैं, लेकिन पहले पेड़ उगाना पड़ता है। यह बात वस्तुतः (literally) भी सच है और लाक्षणिक रूप में (figuratively) भी सच है।

क्या आपने कभी पेड़ लगाया है? पेड़ उगाने के लिए पहले हमें जगह चाहिए फिर पेड़ लगाकर उसे खाद पानी देकर वर्षों उसकी देखभाल करनी पड़ती है। तब कहीं वर्षों बाद हमें उसका फल प्राप्त होता है। जब कोई यह कहता है कि क्या पैसे पेड़ पर उगते हैं? तो दरअसल उसने या उसके पूर्वजों ने वर्षों पहले पेड़ नहीं लगाया था।

नीम का पेड़

हमारे गावों में अधिकतर घरों के सामने नीम का पेड़ होता है। यह नीम हमारे बहुत काम आती है। यह नीम हमें छाया देतीं है और वातवरण ठंडा रखती है, यही नीम हमारा वातावरण शुद्ध रखती है और हमें आक्सीजन प्रदान करती है, इसी नीम से हमें दातौन प्राप्त होती हा जो हमारे मौखिक स्वास्थ्य (oral health) के लिए लाभप्रद है, इसी नीम की छाल, निबौलियाँ, फूल और पत्तों से अनेकानेक औषधियां बनायी जाती हैं, इसी नीम का प्रयोग खाद एवं कीटनाशक के रूप में किया जाता है जिससे हमारी फसलों एवं अन्न की देखभाल होती है, इसी नीम से हमें लकड़ी प्राप्त होती है जिसे हमरे गृह निर्माण के लिए प्रयोग किया जाता है।

अब आप खुद ही हिसाब लगा लीजिए की कई वर्षों तक एक साधारण से पेड़ से हमें कितने पैसों का लाभ मिलता है।

मित्रों चीन में एक कहावत है
पेड़ लगाने का सबसे अच्छा समय २० साल पहले था और दूसरा सबसे अच्छा समय अभी है।
The best time to plant a tree was 20 years ago. The second best time is now.

मित्रों यदि आपने या आपके पूर्वजों ने पहले ज्यादा पेड़ नहीं लगाये तो कोई बात नहीं पर पेड़ लगाने का दूसरा सबसे अच्छा समय अभी है। तो दोस्तों पेड़ लगाइए और उनकी देखभाल कीजिए।

यदि आपने पेड़ लगाए हैं और उनके बारे में बताना चाहते हैं तो हमें कमेंट के द्वारा जरूर बताएं।

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2/9/15

सफल भारत

भारत को सफल बनाएं

सफल भारत

मित्रों भरत को अग्रेजों की गुलामी से आज़ाद हुए 68 साल पूरे हो चुके हैं, यानिकी हम अपना 69वां स्वतंत्रता दिवस मना चुके हैं। और आज इस वेबसाइट SafalBharat.com (सफलभारत.कॉम) का शुभारंभ हो रहा है।

कोई भी काम शुरु करने के पीछे कोई उद्देश्य होता है। और इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए हम प्रयास करते हैं ताकि हमें अपने उद्देश्य में सफलता मिल सके। इसी प्रकार SafalBharat.com (सफलभारत.कॉम) की शुरुआत भी एक उद्देश्य की सफलता के लिए किये जाने वाले प्रयासों का एक हिस्सा है। तो फिर हमारा उद्देश्य क्या है?

मित्रों हमारा उद्देश्य है हमारे देश भारत को सफल बनाना। आप सोच रहे होंगे देश को सफल बनाने के लिए किसी वेबसाइट की क्या आवश्यकता है? तो मित्रों पहले हमे समझना होगा कि एक देश क्या होता है? और यह किन चीजों से मिलकर बना होता है, फिर हमें समझना होगा कि सफलता क्या है और किसी देश को हम सफल कब मानते हैं?

पहले हम देश के बारे मे विचार करते हैं, क्या एक भूभाग देश है? क्या वहाँ के लोग एक देश हैं? क्या सरकार एक देश है? दरअसल देश एक परिकल्पना (Concept) है। देश की परिकल्पना में एक छोटा या बड़ा भूभाग, उस भूभाग से जुड़े हुए लोग एवं उनके लिए नियम कानून बनाने एवं उसे चलाने वाली एक शासन व्यवस्था होती है।

अब बात करते हैं एक सफल देश की। एक सफल देश वो होता है जिसकी सीमाएं सुरक्षित होती हैं, जिसके लोग सुरक्षित होते हैं और अपने जीवन यापन में सफल होते हैं तथा स्वयं उस देश के नागरिक होने पर गर्व करते हैं। एक सफल देश का शासनतंत्र सीमाओं को सुरक्षित बनाने एवं नागरिकों को सफल बनाने के उद्देश्य से अपने कार्य में सफलता प्राप्त करता है। इन तीन चीजों के द्वारा आप भारत की सफलता का आकलन कर सकते हैं।

एक बात और मित्रों सफलता कोई स्थाई चीज नहीं होती, जो आज सफल है कल असफल हो सकता है और जो आज असफल है वो कल सफल हो सकता है। सफल होने और बने रहने के लिए हमें निरंतर प्रयास करते रहना पड़ता है।

SafalBharat.com (सफलभारत.कॉम) का उद्देश्य इस देश के अधिक से अधिक नागरिकों को सफल बनाना है। जी हाँ मित्रों SafalBharat.com का प्रयास है कि आप सफल हों। क्योंकि जब आप सफल होंगे, जब आप सुरक्षित महसूस करेंगे, जब आप अपना जीवन यापन सफलता पूर्वक कर सकेंगे, जब आप अपने देश पर गर्व करेंगे तब सफल भारत का निर्माण होगा।

अब प्रश्न यह उठता है कि SafalBharat.com इसमें आपकी सहायता कैसे कर सकता है? इसका उत्तर है कि सफलभारत.कॉम आपको वो जानकारियाँ उपलब्ध करा सकता है जिससे आप अधिक सुरक्षित हो सकें, जिससे आपके जीवन यापन में सहायता प्राप्त हो और जिससे आप भारतीय होने पर गर्व कर सकें। अर्थात आपकी सफलता में ही देश की सफलता है और देश की सफलता मैं SafalBharat.com की।

तो अगर आप चाहते हैं कि भारत को एक सफल देश माना जाय तो आप सफल हो जाइए। और जब आप सफल हो जायेंगे और आपही की तरह हजारों लाखों लोग सफल हो जायेंगे तो भारत देश सफल हो जायेगा।

क्या आप सफल होना चाहते हैं? क्या आप भारत को सफल बनाना चाहते हैं? यदि हाँ तो अभी सब्सक्राइब (subscribe) कीजिए और सफलभारत.कॉम के नए पोस्ट की जानकारी अपने ईमेल पर प्राप्त कीजिए।

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