5/6/16

English बोलना कैसे सीखें How To Learn To Speak English

आप English बोलना क्यों सीखना चाहते हैं?


क्या आप English बोलना सीखना चाहते हैं? क्या आपको लगता है की अगर आप English बोलना जानते तो इससे आपको अपने जीवन में फायदा होता? क्या English न बोल पाने की वजह से आपको काफी नुकसान उठाना पड़ा है? क्या आप से कम deserving होते हुए भी सिर्फ English बोल पाने की वजह से लोग आप से आगे निकल गए हैं? क्या English न बोल पाने की वजह से आपको ignore किया जाता है और English बोलने वालों को आपसे ज्यादा तवज्जो दी जाती है?

यहाँ पर हम सैकड़ों कारण गिना सकते हैं कि आपको English बोलना क्यों आना चाहिए? हो सकता है कि कोई कारण आपको बेवकूफी भरा लगे या कोई कारण आपको बहुत जरूरी लगे जिसकी वजह से आप सोचते हों कि हर किसी को English बोलना सीखना चाहिए।

English सीखने का कोई कारण बड़ा है या छोटा इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। महत्वपूर्ण ये है की जिन कारणों से आप English बोलना चाहते हैं वो आपके लिए कितने जरूरी हैं।

कारण कोई भी हो वो आपके लिए महत्वपूर्ण होना चाहिए। अगर आपके English सीखने का कारण आपके लिए बड़ा और महत्वपूर्ण नहीं है तो आपको English बोलना सीखने में बहुत दिक्कत होगी।

आपके English सीखने के एक या एक से अधिक कारण हो सकते हैं। इन्हें आप अपनी diary में लिख लीजिये। देखिये English बोलना कोइ हप्ते दो हप्ते या महीने दो महीने में तो सीखा नहीं जा सकता। इसमें लम्बा वक्त लगता है। इस लिए आपके जो भी कारण हैं उन्हें लिख लीजिये। हो सकता है की समय के साथ आपके इन कारणों में से कोई अब उतना महत्वपूर्ण ना रह जाये या फिर कोई और महत्वपुर्ण कारण आ जाये तो समय-समय पर आप इसे update करते रहिये।

अब रहा सवाल क्या आप English बोलना सीख सकते हैं?


अगर आप English बोलना सीखना चाहते हैं तो आप जरूर सीख सकते हैं क्योंकि कोई भी English बोलना सीख सकता है। चाहे वो बच्चा हो बुढा हो या जवान हो। मैं तो यहाँ तक कहना चाहूँगा की एक अनपढ़ आदमी भी English बोलना सीख सकता है। क्यों? क्योंकि English एक भाषा है और कोई भी भाषा सीखने के लिए पढ़ा लिखा होने की जरूरत नहीं होती। कोई भी बच्चा स्कूल जाने के पहले अपनी मातृ भाषा बोलने लगता है। तो फिर English बोलना कौन सा असंभव काम हुआ।

इस सवाल का जवाब बहुत आसान है। आप अंग्रेजी बोलना सीख सकते हैं लेकिन आपके English बोलना सीखने का कारण किसी और के लिए हो न हो आपके लिए बड़ा और महत्वपूर्ण होना चाहिए। क्योकि इस कारण की वजह से ही आप लम्बे समय तक English सीखने के लिए प्रयासरत रह पाएंगे।

तो सबसे पहले हम जानते हैं कि English बोलने के लिए हमें क्या मूलभूत चीजें सीखनी होंगी? सिर्फ English ही नहीं कोई भी भाषा सीखने के लिए हमें मूलतः 3 चीजें सिखनी होती हैं

1. शब्द भण्डार Vocabulary

किसी भी भाषा में हम चीजों, भावनाओं और घटनाओं को शब्दों द्वारा व्यक्त करते हैं। शब्दों के बिना भाषा की कल्पना करना असंभव हैं। इसलिए अगर आप English बोलना चाहते हैं तो आपको अपने शब्द भण्डार को बढ़ाना पड़ेगा। शब्दों के महत्व को इस प्रकार से समझ सकते हैं कि जब आप अंग्रेजी में कुछ बोलना चाहते हैं और पाते हैं कि आपको कौन सा शब्द प्रयोग करना चाहिए वो मालूम ही न हो या याद ही न आ रहा हो तो आप अटक जाते हैं।

इसी प्रकार किसी के बोले गए शब्दों का अर्थ न जानने पर आपको उसकी बातें समझ में ही नहीं आएंगी। जब आपको सामने वाला क्या बोल रहा है ये समझ ही नहीं आया तो आप अब उससे क्या बात करेंगे और यदि वह आपसे कोई प्रश्न पूछ रहा है तो आप उसे क्या जवाब देंगे?

कई बार हम context से शब्दों के अर्थ का अंदाज लगा लेते हैं पर कई बार इसमें बड़ी गलती भी हो जाती है।

इतना ही नहीं कई बार सही जानकारी न होने पर एक सामान लगने वाले शब्दों में हम confuse भी हो जाते हैं। क्योंकि इनके अर्थ एकदम भिन्न होते हैं। इसलिए आपको अपना शब्द भण्डार बढ़ाना पड़ेगा क्योंकि शब्द English बोलने के लिए सबसे छोटी इकाई (unit) हैं।

2. वाक्य निर्माण

केवल शब्दों के द्वारा ही किसी भाषा में पूरी बात नहीं कह सकते। अपनी बात या भावनाओं को पूर्ण रूप से व्यक्त करने के लिए शब्दों को सही क्रम में लगाने arrange करने की आवश्यकता होती है। शब्दों को सही क्रम में लगाने से वाक्य बनता है जिससे सही अर्थ निकल कर आता है। वाक्यों का निर्माण करके हम चीजों या घटनाओं के काल, स्थिति आदि को व्यक्त करते हैं।

बहुत से लोग सोचते हैं कि वाक्य निर्माण के लिए व्याकरण grammar की आवश्यकता होती है। पर एक बात याद रखिये किसी भी भाषा के आधार पर उसका व्याकरण बनाया जाता है व्याकरण के आधार पर भाषा नहीं। यही कारण है कि जब आप grammar पढ़ते हैं तो पाते हैं कि उसमे कई rules के एक्सेप्शन्स होते हैं। अगर व्याकरण के आधार पर कोई भाषा बनायी जाती तो एक तो उसका grammar बहुत simple होता और दूसरा rules में एक्सेप्शन्स नहीं होते और तीसरा शायद उस भाषा में कवितायें भी नहीं बनतीं।

तो अंग्रेजी सीखने के लिए जो दूसरा काम आपको करना होगा वो है अपनी वाक्य निर्माण क्षमता को बढ़ाना होगा।

3. शब्द उच्चारण क्षमता Pronunciation

किसी भाषा में हम शब्द जानते हैं वाक्य भी बना लेते हैं, पर जब तक हम इन शब्दों और वाक्यों का सही उच्चारण नहीं कर पाते तब तक हम उसे बोल नहीं सकते। और अगर हम शब्द और वाक्य जानते है और उच्चारण गलत करते हैं तो सामने वाला हमें समझेगा कैसे?

कई ध्वनियाँ जो अंग्रेजी में इस्तेमाल होती हैं वो हिंदी में नहीं होती ऐसे में आपको नयी ध्वनियाँ निकालना सीखना पड़ेगा। आप अपनी मातृ भाषा की ध्वनियों से ही English का शुद्ध उच्चारण नहीं कर सकते।

शब्दों के गलत उच्चारण से कई बार अर्थ का अनर्थ भी हो जाता है। इसलिए अगर आपको English बोलना सीखना है तो आपको शब्दों का सही उच्चारण करना सीखना ही पड़ेगा।

इस post में हमने देखा की आप अंग्रेजी बोलना क्यों सीखना चाहते हैं? क्या आप अंग्रेजी बोलना सीख सकते हैं? और अंग्रेजी बोलने के लिए आपको कौन सी तीन चीजें सीखनी होंगी?

तो इतना पढ़ने के बाद आप जान गए की आप के लिए अंग्रेजी बोलना सीखने के बड़े और महत्वपूर्ण कारण क्या हैं? और आप ये भी जान गए की आप अंग्रेजी बोलना सीख सकते हैं यहाँ तक की एक अनपढ़ आदमी या एक बच्चा भी अंग्रेजी बोलना सीख सकता है। और आपको यह भी पता हो गया कि अंग्रेजी बोलने के लिए आपको अपनी Vocabulary, Sentence Making Ability and Pronunciation क्षमता को बढ़ाना होगा।

इतना जानने के बाद अब आपके सामने challenge है की आप अपनी इन क्षमताओं को बढ़ाएंगे कैसे?

तो इसका जवाब मैं आपको अपनी अगली पोस्ट में दूंगा। अपनी अगली पोस्ट में मैं आपको बताऊंगा कि
  • आप अपने शब्द भण्डार (Vocabulary) को कैसे बढ़ा सकते हैं और कम नए शब्दों को सीख कर भी आपसे अधिक शब्द भण्डार वाले व्यक्ति से भी अच्छी अंग्रजी कैसे बोल सकते हैं।
  • आप अपनी वाक्य निर्माण क्षमता (Sentence Making Ability) कैसे बढ़ा सकते हैं और कोई शब्द मालूम ही ना होने या जल्दी याद ना आने पर भी आप अपनी बात कैसे कह सकते हैं।
  • आप अपने उच्चारण (Pronunciation) को कैसे ठीक कर सकते हैं और अपनी muscles को English Pronunciation के लिए कैसे Train कर सकते हैं ताकि English बोलते समय बार-बार आपकी जबान न फिसले।

जरूर पढ़ें अगला भाग English बोलना कैसे सीखें (कैसे)

अंग्रेजी सीखने के टिप्स के लिए पढ़ें अंग्रेजी बोलना सीखने के बेहतरीन टिप्स


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17/5/16

फेसबुक इतने पैसे कैसे कमाता है? How Does Facebook Earns So Much Money?

फेसबुक इतने पैसे कैसे कमाता है

आज फेसबुक (Facebook) हर कोई परिचित है। Facebook से हम आपस में connect हो सकते हैं और एक दूसरे का हाल-चाल जान सकते हैं। आप समझ सकते हैं कि फेसबुक आपके कितने काम की चीज है।

Facebook के संस्थापक मार्क ज्युकरबर्ग हैं और कंपनी का नाम फेसबुक इंक. है। फेसबुक के वर्तमान समय में 165 करोड़ एक्टिव मासिक users हैं और फेसबुक की कमाई इस तिमाही में 5.4 बिलियन डॉलर यानि ३६ हजार करोड़ रूपये थी।

आप सोच रहे होंगे फेसबुक इतनी कमाई कैसे करती है? वो आखिर क्या बेचती है जिससे उसे इतनी कमाई होती है?

दोस्तों कोई भी कंपनी दो प्रकार से कमाई कर सकती है। सेवाएँ services देकर या उत्पाद products बेचकर। Facebook हमें सेवाएँ देती है यानि की हम Facebook services use करते हैं। तो क्या हम उसके ग्राहक हैं? किन्तु हम Facebook को कोई पैसा नहीं देते तो फिर हम उसके customer कैसे हुए?

असल में फेसबुक के ग्राहक उसके प्रचारक (advertisers) हैं, और फेसबुक के users उसके लिए उसके उत्पाद यानिकि product हैं, जिसे वह अपने प्रचारकों advertisers को बेचती है।

दरअसल Facebook के पास अपने users की बहुत सी जानकारियाँ रहती हैं जिसके आधार पर कॅम्पनियां targeted advertising कर सकती हैं। इस प्रकार के प्रचार में कॅम्पनियों के प्रोडक्ट्स जिनके लिए होते हैं उन्ही को target करके add दिखाया जाता है अन्य लोगों को नहीं।

आप जो भी जानकारी फेसबुक पर share करते हैं वो Facebook के रिकॉर्ड में रहती है। इससे फेसबुक आपके बारे में बहुत सी बातें जान जाता है।

Facebook आपके बारे में क्या-क्या जान सकता है?

  • आप कितना और कहाँ से पढ़े हैं?
  • आपके परिवार में और कौन कौन हैं?
  • आपके मित्र कौन हैं?
  • आपकी उम्र कितनी है?
  • आप कहाँ घूमने जाते हैं?
  • आप कहाँ रहते है?
  • आप किस पार्टी के समर्थक हैं?
  • आप किस नेता के समर्थक हैं?
  • आप कहाँ काम करते हैं?
  • आप ऑफिस कब जाते हैं?
  • आप घर वापस कब आते हैं?
  • आप किस रेस्तरां में खाना पसंद करते हैं?
  • आप किस-किस देश की यात्रा पर गए थे?
  • आपकी marriage anniversary कब है?
  • आप honeymoon मनाने कहाँ गए थे?
  • आप कौन सा मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हैं?
  • आपका phone no और mobile नंबर क्या है?
  • आपने कौन सा नया सामान जैसे घर, मोबाइल या कार खरीदी है?
  • Facebook आपके फोटो को पहचान सकता है तब भी जब आपकी फोटो पीछे से ली गयी हो।

और तो और जो बातें आप स्वयं अपने बारे में नहीं जानते, वो भी Facebook को पता चल जाती हैं जैसे आपके stalker on Facebook कौन हैं?

सबसे बड़ी बात इसमें से ज्यादातर जानकारियाँ आप स्वयं फेसबुक को देते हैं, और बची-खुची कसर आपके Facebook friends पूरी कर देते हैं।

Facebook आपकी जानकारी कैसे एकत्र करता है?

  • आपके profile से
  • आपके द्वारा share किये गए फोटो और अन्य पोस्ट्स से
  • आपको tag किये गए फोटो से
  • आपके द्वारा किये गए कमेंट से
  • आपके पोस्ट पर अन्य लोगों द्वारा किये गए कमेंट्स से
  • आपके चैट से
  • आपके द्वारा लाइक किये गए posts से
  • आपके द्वारा पढ़े गए न्यूज़ और articles से
  • facebook इस्तेमाल करने के लिए आपके द्वारा use किये गए devices जैसे मोबाइल, लैपटॉप, tablets से
  • आपके द्वारा join किये गए groups से

Facebook आपकी इन सब जानकारियों को एकत्र कर आपको एक उत्पाद बना देता है। और फिर इस जानकारी से प्रचारकों (advertisers) को अपने platform पर प्रचार (advertise) करने के लिए लुभाता है।

प्रचार करना कोई नयी बात नहीं है। ये सिलसिला सैकड़ों बल्कि हजारों वर्षों से चल रहा है। केवल प्रचार के नये-नये माध्यम निकलते रहते हैं। प्रचार करने के लिए अखबार, पत्रिकाएं, रेडियो, टेलीविज़न आदि साधन तो पहले से ही मौजूद हैं इनमे एक नया माध्यम internet भी जुड़ गया है।

प्रचार के प्रत्येक माध्यम की अलग अलग विशेषताएं होती हैं जो अलग-अलग प्रकार के उत्पादों के प्रचार के लिए उपयुक्त suitable हैं।

हर प्रचारक चाहता है की अपने उत्पाद का प्रचार वह उन्ही लोगों को करे जिसको वह अपना product बेचना चाहता है। और इसी के आधार पर वह प्रचार का माध्यम चुनता है जिससे प्रचार का खर्च कम हो और प्रभाव impact अधिकतम हो।

और इसी लिए advertisers फेसबुक को इतना पसंद करते हैं क्योंकि वो आपके gender, age, location और सबसे बड़ी बात आपके interest के हिसाब से प्रचार दिखा सकते हैं।

फेसबुक के जाने अनजाने आप पर क्या बुरे प्रभाव पड़ सकते हैं जानने के लिए जरूर पढ़ें फेसबुक के आप पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव


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1/4/16

ज्ञान और शिक्षा पर चाणक्य के अनमोल विचार Chanakya Quotes on Knowledge and Education

आचार्य चाणक्य के अनमोल विचार
आचार्य चाणक्य

ज्ञान और शिक्षा को भारत देश ने हजारो वर्षों से बहुत महत्व दिया है, इस पर आचार्य चाणक्य के कुछ अनमोल विचार (Chanakya Quotes in Sanskrit and Hindi) यहाँ प्रस्तुत हैं।

यस्मिन देशे न सम्मानो न वृत्तिर्न च बान्धवाः।
न च विद्यागमः कश्चित् तं देशं परिवर्ज्येत्।।
जिस देश में सम्मान, आजीविका का साधन, मित्र रिश्तेदार और विद्या अर्जित करने के साधन न हों ऐसे देश को छोड़ देना चाहिए।

विषादप्यमृतं ग्राह्य्ममेध्यादपि काञ्चनम्।
निचादप्युत्तमा विद्या स्त्रीरत्नं दुष्कुलादपि।।
विष में यदि अमृत हो, गन्दगी में यदि सोना हो, नीच मनुष्य के पास कोई विद्या हो और दुष्ट कुल में अच्छी स्त्री हो तो उन्हें ग्रहण कर लेना चाहिए।

माता शत्रुः पिता वैरी येन बालो न पाठितः।
न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये बको यथा।।
अपने बच्चों को न पढ़ाने वाले माता-पिता उनके शत्रु के सामान हैं। क्योंकि अनपढ़ मनुष्य किसी सभा में उसी प्रकार अशोभनीय होते हैं जैसे हंसों के झुंड में बगुला।

श्लोकेन वा तदधेन पादेनैकाक्षरेन वा।
अबंध्यं दिवसं कुर्याद् दानाध्ययन कर्मभिः।।
व्यक्ति को एक श्लोक, एक श्लोक ना हो सके तो आधे श्लोक का ही या जितना हो सके उतना ही अध्यययन करना चाहिए। व्यक्ति को ज्ञान अर्जित करते हुए अपने दिन को सार्थक बनाना चाहिए।

कामधेनुगुणा विद्या ह्यकाले फलदायिनी।
प्रवासे मातृसदृशी विद्यागुप्तं धनं स्मृतम।।
विद्या में कामधेनु के गुण होते हैं जो असमय ही फल देते हैं। विदेश में विद्या माँ के सामान है इसलिए इसे गुप्त धन कहा गया है।

जनिता चोपनेता च यस्तु विद्यां प्रयच्छति।
अन्नदाता भयत्राता पञ्चैते पितरः स्मृता।।
जन्म देने वाला, आध्यात्मिकता से परिचय कराने वाला, विद्या देने वाला, अन्न देने वाला तथा भय से मुक्ति देने वाला ये पांच व्यक्ति पितर माने गए हैं।

वित्तेन रक्ष्यते धर्मो विद्या योगेन रक्ष्यते।
मृदुना रक्ष्यते भापः सत्स्त्रिया रक्ष्यते गृहम।।
धर्म की रक्षा धन से, विद्या की रक्षा योग से, राजा की रक्षा मृदुता से और घर की रक्षा अच्छी स्त्रियों से होती है।

विद्या मित्रं प्रवासेषु भार्या मित्रं गृहेषु च।
व्याधितस्यौषधं मित्रं धर्मो मित्रं मृतस्य च।।
विदेश में विद्या, घर में पत्नी, रोग में दवा और मरे हुए का धर्म ही उसके मित्र हैं।

धन-धान्यप्रयोगेषु विद्यासंग्रहणेषु च।
आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्।।
पैसे के लेंन-देन में, विद्या ग्रहण करने में, भोजन करने में और व्यवहार करने में जो शर्म नहीं करता वह सुखी रहता है।

संतोषस्त्रिषु कर्तव्यः स्वदारे भोजने धने।
त्रिषु चैव न कर्तव्योऽध्ययने तपदनायोः।।
स्त्री, भोजन और धन इन तीनो का संतोष करना चाहिए किन्तु विद्या अध्ययन, तप और दान का संतोष नहीं करना चाहिए।

शुनः पुच्छमिव व्यर्थं जीवितं विद्या विना।
न गृह्यगोपने शक्तं न च दंशनिवारणे।।
विद्या के बिना मनुष्य का जीवन कुत्ते की उस पूँछ के सामान है जिससे ना तो वह अपने मल द्वार को ही ढक सकता है और न ही खुद को काटने वाले कीड़ों को ही भगा सकता है।

क्रोधो वैवस्वतो रजा तृष्णा वैतरणी नदी।
विद्या कामदुधा धेनुः संतोषो नन्दनं वनम्।।
क्रोध यमराज, तृष्णा वैतरणी, विद्या कामधेनु और संतोष नन्दन वन के सामान है।


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