भरी गर्मी की तपती दोपहर में एक बूढ़ा बगुला तालाब के किनारे गर्दन झुकाए शांत भाव से खड़ा था। उसके इस शांत स्वाभाव को देखकर उसके मन में चल रहे भूचालों का अनुमान लगाना मुश्किल था।
जीवन में अलग-अलग फेज़ आते हैं। जब हम बच्चे होते हैं तो माँ-बाप हमारी देखभाल करते हैं, और जब हम जवान होते हैं तब हम अपनी बाजुओं की ताकत, उद्यमिता और बुद्धि से अपना जीवन यापन करते हैं। किन्तु जब बुढ़ापा आता है तब ना तो हमारे माँ-बाप ही होते हैं ना ही हमारी बाजुओं में इतनी ताकत होती है की हम अपना जीवन यापन कर सकें।
बुढ़ापे में दिन प्रतिदिन परिस्थितियाँ बद से बदतर होती जाती हैं। और हमारी सारी इन्द्रियाँ हमारा साथ छोड़ने लगती हैं। और एक ऐसा समय आता है जब हमारे लिए पेट भरना भी मुश्किल हो जाता है। फिर हमें उस अपरिहार्य दुश्मन की शक्ति का एहसास होता है जिससे हम हजारों बार भी जीत जायें पर एक हार ही सब कुछ ख़त्म कर देती है।
आज उस बूढ़े बगुले को अपनी मौत दिखाई दे रही थी। इसी तलब के किनारे कितने ठाठ से हँसी ख़ुशी उसका बचपन और जवानी बीती थी। इस तालाब में खाने लायक इतनी मछलियाँ, मेढक और अन्य जीव थे कि आज तक कभी भी उसने भूखा रहने का सपना भी नहीं देखा था।
लेकिन धीरे-धीरे समय बीतता गया और अब बुढ़ापे ने उसे आ घेरा था। एक-एक कर उसकी इन्द्रियाँ और अन्य अंग कमजोर होते चले गए और तालाब से मछलियाँ और मेंढक पकड़ना मुश्किल होता चला गया। आज उसके जीवन में पहली बार ऐसा हुआ था कि वो पिछले दो दिनों से भूखा था। और आगे भी भोजन मिलने की कोई उम्मीद नज़र नहीं आ रही थी।
लेकिन वह बूढ़ा बगुला हार मानने वालों में से नहीं था। वो अभी और जीना चाहता था और इसके लिए जो भी जरूरी हो और जो भी वह कर सकता था वो करने के लिए वह पूरी तरह से तैयार था। जीने के लिए उसे भोजन की आवश्यकता थी और आज भले ही उसके बल ने उसका साथ छोड़ना शुरू कर दिया था परन्तु उसकी बुद्धि आज भी उसके साथ थी। और जो काम बल से ना हो सके उसके लिए बुद्धि का प्रयोग करना चाहिए ऐसा सोचकर वह बूढ़ा बगुला आज बहुत ही बुद्धिमत्तापूर्ण और कुटिल योजना के तहत वहाँ खड़ा हुआ था।
तालाब के किनारे गर्दन झुकाए शांत भाव से खड़े बूढ़े बगुले ने बीच-बीच में जोर-जोर से विलाप करना शुरू किया। “हे भगवान इस तलब के जीवों को सद्बुधि दे, और इन्हें महा प्रलय से बचा”।
बगुले का ऐसा विलाप सुनकर तालाब में रहने वाले एक केकड़े ने सोचा जिस बगुले को इस समय मछलियाँ और मेंढक पकड़ने चाहिए वो ऐसी अवस्था में विरक्त होकर विलाप कर रहा है जरूर कोई बात होगी। मुझे इसका पता लगाना चाहिए।
ऐसा सोचकर केकड़ा बूढ़े बगुले के पास गया और पूछा बगुला मामा जब आपको अपनी पेट पूजा करनी चाहिए ऐसे समय में आप यहाँ खड़े होकर विलाप क्यों कर रहे हैं?
इसपर बगुले ने कहा भांजे मुझे जो जानकारी मिली है उसके बाद तो मेरी भूख-प्यास ही मर गयी है। मेरा क्या है मैं तो बूढ़ा हो चुका हूँ। और वैसे भी जल्दी ही मरने वाला हूँ। पर मुझे तो तुम लोगों की चिंता हो रही है, जो जवानी में ही काल के गर्त में सामने वाले हैं।
बगुले की ऐसी बातें सुनकर केकड़ा घबरा गया। “ऐसी के बात हो गयी?” उसने पूछा।
बूढ़े बगुले ने कहा मुझे एक ज्योतिषि ने बताया है कि गृह नक्षत्रों का ऐसा मनहूस योग बना है कि अगले १२ वर्षों तक यहाँ बारिश नहीं होगी। और यह तालाब तो अभी से सूख रहा है देखो जहाँ पानी भरा रहता था वो जमीन आज धुप से तप रही है और ऐसी फट गयी है जैसे सबको निगल ही लेगी।
अब बारिश तो होने से रही और यह तालाब १२ वर्ष तो क्या १२ दिन में ही सूख जाने वाला है। तब सबकी मौत निश्चित है। पर इस तालाब के बाशिंदों को तो कोई चिंता ही नहीं है।
अब तो केकड़ा और भी अधिक घबरा गया। उसकी समझ में ही नहीं आ रहा था कि तालाब सूख जाने पर उसकी जान कैसे बचेगी। इसलिए उसने बगुले से पुछा तो इसका उपाय क्या है?
बूढ़े बगुले ने कहा इसका कोई अनोखा उपाय नहीं है। उपाय वही है जो दूर-दूर तक अन्य छोटे तालाबों के सारे रहवासी कर रहे हैं। वो अपने परिजनों और मित्रों को लेकर पूर्व दिशा में एक बहुत बड़े पाताली तालाब में जा रहे हैं। उस तालाब में पाताल से पानी आता है इसलिए १२ वर्ष तो क्या २४ वर्षों तक भी अगर पानी न बरसे तो भी वह पाताली तालाब पानी से भरा रहेगा। इस प्रकार दूसरे तालाबों के लोग आपस में इकट्ठे होकर और अपनी शत्रुता को भुला कर अपने लोगों की रक्षा करने में लगे हैं, पर यहाँ तो किसी को कुछ पड़ी ही नहीं है।
बूढ़े बगुले की ऐसी बातें सुनकर केकड़े ने तालाब में जाकर अन्य जीवों को ये बात बताई। देखते ही देखते भयंकर सूखे की यह बात तालाब के पानी में जंगल की आग की तरह फ़ैल गयी। अब तो तालाब में हर जगह बस एक ही बात हो रही थी। ऐसी चिंतापूर्ण बात उस तालाब के जीवों ने पहले कभी नहीं सुनी थी। जिसने भी सुना वो घबरा गया और अपनी जान बचाने के उपाय सोचने लगा।
कुछ जीव तो बहुत ही अधिक घबरा गए और सोचा क्यों न हम चलकर बूढ़े बगुले से ही सही जानकारी ले लें। ऐसा विचार विमर्श कर ये जीव केकड़े के साथ बगुले के पास पहुंचे। बगुले ने उन्हें वही कहानी फिर से सुनाई जो उसने केकड़े को सुनाई थी।
अब कुछ जीव जैसे मछलियाँ और मेंढक तो बहुत ही चिंतित हो गए। उन्होंने कहा हम कैसे किसी दूसरे तालाब में जा सकते हैं। हम तो पानी से ज्यादा दूर भी नहीं जा सकते, मछलियाँ तो पानी से बाहर ज्यादा देर जीवित भी नहीं रह सकती और उनको जमीन पर चलना भी नहीं आता।
इसपर बगुले ने कहा मैं हूँ ना। मेरा सारा जीवन इसी तालाब के सहारे बीता है और जब मैं बूढ़ा हो गया हूँ और इस संसार से विरक्त हो गया हूँ तो मैं भी इस तालाब के रहवासियों का भला कर कुछ पुण्य कमा लेना चाहता हूँ। मैं एक-एक कर तुम लोगों को अपनी पीठ पर बैठाकर पाताली तालाब पहुँचा दूंगा।
अब तो उस तालाब के बहुत से रहवासी बूढ़े बगुले के पास आने लगे और उसे मामा, चाचा, ताया, दादा आदि बोल कर उससे पाताली तालाब पहुँचाने का आग्रह करने लगे।
बूढ़ा बगुला एक-एक कर उन्हें अपनी पीठ पर बैठाकर प्रतिदिन पाताली तालाब के कई चक्कर लगाने लगा।
उसकी योजना सफल हो चुकी थी। वह बेवक़ूफ़ और डरपोक मछलियों और मेंढकों को पाताली तालाब ले जाने के बहाने अपनी पीठ पर बैठाता और कुछ दूर लेजाकर एक चट्टान पर पटक-पटक कर मार डालता और उन्हें खाकर अपना पेट भरता। फिर थोड़ा आराम कर और थोड़ा समय आस-पास ही व्यतीत कर वापस आता और उसके इंतजार में जमा हुए जीवों को पाताली तालाब के मजेदार किस्से सुनाता। और पाताली तालाब में गए मेंढक और मछलियाँ कितने खुश है उन्हें बताता।
इस प्रकार छल-कपट और अपनी बुद्धि के बल पर बूढ़ा बगुला अपना पेट भरने में सफल हो गया। धीरे-धीरे उसका स्वास्थ्य सुधर गया और वो काफी मोटा हो गया।
इधर केकड़े ने जब पाताली तालाब के किस्से सुने तो वो भी वहाँ जाने के बारे में सोचने लगा। और एक दिन वो बूढ़े बगुले के पास आया और उससे बोला बगुला मामा आपके पास सबसे पहले मैं आया था और आप मुझे ही पाताली तालाब लेकर नहीं चल रहे।
केकड़े की बात सुनकर बूढ़े बगुले ने सोचा रोज-रोज वही मछलियाँ और मेंढक खाकर मैं ऊब चुका हूँ, क्यों न आज केकड़े की दावत उड़ाई जाय। ऐसा सोचकर उसने केकड़े को अपनी पीठ पर बैठाया और उस चट्टान की ओर उड़ चला जहाँ उसने मछलियों और मेंढकों को पटक कर मारा था।
केकड़े ने जब एक चट्टान पर हड्डियों का ढेर देखा तो उसने बूढ़े बगुले से पुछा मामा वो सामने उस चट्टान पर हड्डियों का ढेर क्यों लगा हुआ है?
बगुले को केकड़े के भोलेपन पर बहुत हँसी आ रही थी। उसने कहा ये उन मछलियों और मेंढको की हड्डियाँ हैं जिन्हें मैं अपनी पीठ पर बैठाकर लाया था। ऐसा कहकर बूढ़ा बगुला अपनी चालाकी और केकड़े के भोलेपन पर जोर-जोर से हंसने लगा।
अब केकड़ा सारी बात समझ चुका था और उसे अपनी बेवकूफी पर बहु गुस्सा आ रहा था। उसने अपने मजबूत बाजुओं से बगुले की गर्दन पकड़ी और अपने नुकीले दांतों से उसे काट दिया। बूढ़े बगुले की इन्द्रियाँ आज उसकी बुद्धि पर भारी पड़ी थीं, नया स्वाद चखने के चक्कर में आज उसकी इह लीला समाप्त हो गयी।
उधर तालाब पर कई मछलियाँ और मेंढक बूढ़े बगुले का इन्तजार कर रहे थे। हर कोई चाहता था की वह ही बूढ़े बगुले से सबसे पहले मिले ताकि बूढ़ा बगुला उसे पाताली तालाब ले जाये। तभी उन्हें बूढ़े बगुले की गर्दन अपने बाजू में दबाए केकड़ा आता दिखाई पड़ा। केकड़े ने उन्हें बूढ़े बगुले की सारी चाल बतायी।
तालाब के जीव दुख, क्रोध और कृतघ्नता के भावों से भर गए थे। अपने डर पर बहुत शर्मिंदा थे। बगुले के लालच ने ही आज उन सबकी जान बचाई थी।
मित्रों इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है
1. जो काम बल से नहीं हो सकता वो बुद्धि से किया जा सकता है। इसलिए हमें अपनी सफलता के लिए बल और बुद्धि दोनों का प्रयोग करना चाहिए। जिस प्रकार बूढ़ा बगुला अपने बल के कमजोर होने पर अपनी बुद्धि से अपना पेट भरने में सफल हो गया।
2. जब कोई किसी काम को करने की ठान ले और उस काम के लिए जो भी जरूरी हो वो करे तो उसे सफलता अवश्य मिलती है।
3. हमें अपनी इन्द्रियों के वशीभूत होकर अनावश्यक खतरे नहीं लेने चाहिए। जिस प्रकार बगुले ने अपनी जीव्हा के वशीभूत होकर केकड़े के हाथों अपनी जान गवांई।
4. हमें अपने दुश्मनों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। जिस प्रकार मछलियों और मेंढकों ने बूढ़े बगुले पर विश्वास कर अपनी जान गंवाई।
5. हमें डूम्स डे दिखाने वालों यानि प्रलय आने वाली है या बहुत बुरा कुछ होने वाला है ऐसा कहने वालों से सावधान रहना चाहिए।
6. हमें जो खतरे हैं उनसे सदा सावधान रहना चाहिए। अक्सर लोग असावधान हो जाते हैं जिससे दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जाती है।
बूढ़े बगुले की हालत तो मरता क्या न करता वाली थी। लेकिन आपको समाज में ऐसे बहुत से लोग मिल जायेंगे जो आपको झूठे डर दिखा कर अपना उल्लू सीधा करते हैं और आपके जान माल का नुकसान करते हैं। क्या आपका भी पाला ऐसे किसी धूर्त और धोकेबाज इंसान से पड़ा है? वह धूर्त पीर, फ़कीर, बाबा, तांत्रिक, ज्योतिषि, डॉक्टर, पुलिस, नेता या अन्य किस पेशे से था? हमें ईमेल या कमेंट के माध्यम से बताएं।
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13/9/16
7/8/16
अपनी सफलता के लिए SWOT एनालिसिस कैसे करें
मित्रों कोई भी काम, नौकरी, प्रोजेक्ट या बिज़नेस करने के पहले हमारे सामने दुविधा होती है कि मुझे ये काम करना चाहिए या नहीं? क्या इसमें मुझे सफलता प्राप्त होगी या नहीं? किसी बिज़नस या प्रोजेक्ट में हम कितने पानी में हैं? इस प्रकार की समस्याओं के रणनीतिक (strategic) समाधान के लिए SWOT एनालिसिस किया जाता है।
इस पोस्ट में हम जानेंगे की SWOT एनालिसिस क्यों किया जाता है? SWOT एनालिसिस क्या होता है? और एक उदाहरण के साथ हम जानेंगे कि SWOT एनालिसिस कैसे किया जाता है? और SWOT एनालिसिस करते समय हमे क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
दरअसल किसी भी काम को करने के पश्चात् यदि वांछित सफलता नहीं मिलती तो हमारी मेहनत, रिसोर्स और समय बर्बाद हो जाता है।
इसलिए किसी भी काम को करने के पहले हमारी उसमें सफलता या विफलता की क्या संभावनाएं हैं, जान लेना काफी फायदेमंद होता है।
किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए उस कार्य के बारे में हमारी जितनी अधिक जानकारी होगी या जितना अधिक अनुभव होगा उतना ही सही तरीके से हम उस कार्य की सफलता या विफलता का अंदाजा लगा सकते हैं।
इस प्रकार किसी कंपनी या व्यक्ति के किसी प्रोजेक्ट या कार्य में सफलता का अनुमान लगाने के लिए एक तकनिकी इस्तेमाल होती है जिसे हम स्वाॅट(SWOT) एनालिसिस कहते है।
SWOT अंग्रेजी के चार शब्दों के प्रथमाक्षरों (initial letters) से मिल कर बना है। ये शब्द हैं
SWOT Analysis के द्वारा हम किसी भी कार्य के लिए हमारी strengths और weaknesses क्या है। तथा हमारे सामने क्या opportunities तथा क्या threats (खतरे) हो सकते हैं इन सबका एनालिसिस करते हैं।
इस प्रकार स्वाॅट एनालिसिस के द्वारा हम जान सकते हैं की किसी कार्य या बिज़नस के सफल होने की संभावनाएं हैं। और इसके लिए हमें क्या स्ट्रेटेजीज अपनानी होंगी।
अब आप जान गए कि स्वाॅट एनालिसिस के क्या फायदे हैं तो आइये अब जानते हैं कि स्वाॅट एनालिसिस किया कैसे जाता है?
स्वाॅट एनालिसिस करने के लिए सबसे पहले हमारे पास कोई प्रोजेक्ट, बिज़नस या बिज़नस आईडिया या कोई कार्य होना चाहिए जो आप या आपकी कंपनी करती है या शुरू करना चाहती है।
अब इस कार्य को सफलता पूर्वक पूरा करने के लये दो निकाय हैं एक है आप आपकी टीम या कंपनी जिसकी strength या weakness आपको जानना है और दूसरा है आपका वातावरण (environment) यानि आपका देश, प्रान्त, शहर, नियम-कानून, आपके competitors अदि जिनके द्वारा आपको मौके या खतरे हो सकते हैं।
जब आप स्वाॅट एनालिसिस करें तो आपको अपने आप को पहचानना आना चाहिए या आप अपने किसी परिचित मित्रों का भी सहयोग ले सकते हैं जो आपको आपको और आपकी कमजोरियों और ताकतों को शायद आपसे भी अच्छी तरह जानते हों। इसी प्रकार अपने वातावरण द्वारा उपलब्ध मौके और खतरे जानने के लिए आप एक्सपर्ट्स की सलाह भी ले सकते हैं।
अब आप अपने उद्देश्य के हिसाब से अपनी शक्तियों, कमजोरियों, मौकों और खतरों को लिख लीजिये। इसको आप निम्न टेबल से भी समझ सकते हैं।
मित्रों ग्रामीण क्षेत्र के मार्केट में कपड़ों की एक पुरानी दुकान है जो काफी चलती है जिसे मनोज नाम का दुकानदार चलता है। पर पिछले एक साल में वहाँ पर कपड़ों की दो नयी दुकानें खुल गयी हैं। शुरू में मनोज ने सोचा कि ये नयी दुकाने ज्यादा नहीं चलेंगी पर हाल ही में उन्हें पता चला है की नए दुकानदार भी लगभग उनके जितना ही प्रॉफिट कमा रहे हैं।
अब ऐसी परिस्थितियों में मनोज के लिए ये जानना जरूरी हो जाता है कि इन नयी दुकानों से उनके बिज़नस पर क्या असर होगा? और वे ऐसा क्या कर सकता हैं जो उनकी कमाई को कम होने से बचा सके।
इसके लिए मनोज ने SWOT एनालिसिस किया और अपनी शक्ति, कमजोरी, मौके और खतरों को इस प्रकार लिखा
1. हम पुराने हैं इसलिए हमारी ग्राहकी बंधी हुयी है और आस-पास के सभी गाँवों से लोग हमारे यहाँ आते हैं।
2. हमरा व्यवहार सही है और हमारे यहाँ आने वाले लोगों को हम जानते पहचानते हैं इसलिए वे हमारे यहाँ से ही कपड़े खरीदते हैं।
3. हम अन्य लोगों की तुलना में कपड़े सस्ते में बेचते हैं, क्योंकि हम कई शहरों से माल मंगाते हैं।
4. हम कपड़े उधार में भी देते हैं, इसलिए हमारे यहाँ से बहुर दूर-दूर के लोग फाइनेंसियल स्ट्रेस के समय जैसे शादी आदि में कपड़े ले जाते हैं।
1. सस्ते कपड़े बेचने की वजह से हमारे यहाँ लोग सस्ते कपड़े ही ज्यादा खरीदते हैं जिसमें हमें कम मार्जिन मिलता है। और अधिक मार्जिन वाले महंगे कपड़े हमारे यहाँ से कम बिकते हैं।
2. उधर देने की वजह से हर साल लगभग 1 से 2 लाख रुपयों की रिकवरी नहीं हो पाती और हमारा प्रॉफिट काम होता है।
3. उधार न चुकाने वाले लोग हम उधार वापस न मांग लें इस डर से अक्सर हमरी दुकान पर आना बंद कर देते हैं, जिससे बिक्री में कमी आती है।
1. आस पास के दुकानदार कपड़े हमारे यहाँ से महंगे बेचते हैं। इसलिए हम भी अपने यहाँ प्राइस बढ़ाकर अपना प्रॉफिट बढ़ा सकते हैं।
1. हमारे ही मार्केट में दो नयी दुकानें खुल गयीं हैं, जिन्होंने सीसे के दरवाजे लगाये हैं और उनके दुकान के सामने कपड़ों का डिस्प्ले अच्छा लगता है जिससे लोग खासकर ज्यादा पैसे खर्च करने वाले और शहरों में कमाने वाले उन दुकानों की ओर आकर्षित होते हैं।
2. नयी दुकानों में AC लगा है जिससे गर्मियों में जो ग्राहक उनके यहाँ बैठ जाता है महंगा ही सही वहाँ से ही कपड़े ले लेता है।
इस प्रकार दोस्तों अपनी दुकान के स्वाॅट एनालिसिस से मनोज को अपनी स्थिति का सही सही अंदाजा हो गया। और अब वो अपना लाभ बढ़ाने के लिए कई निर्णय ले सकता है जैसे सीसे और AC लगवाना, कीमतें बढ़ाना, उधार बंद करना आदि।
मित्रों स्वाॅट एनालिसिस एक टूल है और किसी भी अन्य टूल की ही तरह इसका इस्तेमाल और उपयोगिता भी इस टूल का प्रयोग करने वाले की दक्षता पर निर्भर करता है। हर एक टूल की कुछ सीमायें होती हैं और इअसका इस्तेमाल करने वालों को इन सीमाओं का ज्ञान होना आवश्यक होता है।
स्वाॅट एनालिसिस कोई मैजिक बुलेट नहीं है कि इसका इस्तेमाल करते ही आपके बिज़नस या कार्य की सारी समस्याएं दूर हो जाएँगी। लेकिन ये आपको सोचने को मजबूर करता है और आपको निर्णय लेने में सहायता करता हैं।
SWOT Analysis के कुछ limitations मैं आपको बताता हूँ
1. स्वाॅट एनालिसिस में आपकी strengths, weaknesses और आपके environment द्वारा उत्पन्न opportunities और threats की जानकारी आपको स्वयं जुटानी पड़ती है, जो आपके नॉलेज और experience पर निर्भर करता है। इसमें कुछ चीजें काफी मुश्किल हो सकती हैं जैसे अपने competitors की जानकारी।
2. इसमें कई बार लोग सिर्फ लिखने के लिए बहुत से पॉइंट लिख देते हैं जिनकी संभावना या impact अधिक नहीं होता। इसलिए इन पॉइंट्स को लिखने के बाद इनको इनके महत्व के आधार पर sort कर लेना चाहिए।
इस प्रकार आपने SWOT एनालिसिस के बारे में जाना। अब अगर आपके पास भी कोई काम, बिज़नस, नौकरी या प्रोजेक्ट है तो तुरंत कीजिये SWOT एनालिसिस और अपनी सफलता की संभावनाओं को सुनिश्चित कीजिये। एक बात और कोई भी नयी चीज सीखकर उसका प्रयोग करने की दक्षता आने में प्रैक्टिस और समय लगता है। इसलिए आप SWOT एनालिसिस अभी से शुरू कर दीजिये ताकि आप इसमें जल्द से जल्द एक्सपर्ट बन जायें और कौन कितने पानी में है ये जान सकें।
दोस्तों SWOT एनालिसिस पर मेरी यह post कैसी लगी? कमेंट या ईमेल के द्वारा हमें बता सकते हैं। हमारा ईमेल पता है safalbharat.com@gmail.com ।
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इस पोस्ट में हम जानेंगे की SWOT एनालिसिस क्यों किया जाता है? SWOT एनालिसिस क्या होता है? और एक उदाहरण के साथ हम जानेंगे कि SWOT एनालिसिस कैसे किया जाता है? और SWOT एनालिसिस करते समय हमे क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
SWOT एनालिसिस क्यों किया जाता है? Why SWOT Analysis Is Done?
दरअसल किसी भी काम को करने के पश्चात् यदि वांछित सफलता नहीं मिलती तो हमारी मेहनत, रिसोर्स और समय बर्बाद हो जाता है।
इसलिए किसी भी काम को करने के पहले हमारी उसमें सफलता या विफलता की क्या संभावनाएं हैं, जान लेना काफी फायदेमंद होता है।
किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए उस कार्य के बारे में हमारी जितनी अधिक जानकारी होगी या जितना अधिक अनुभव होगा उतना ही सही तरीके से हम उस कार्य की सफलता या विफलता का अंदाजा लगा सकते हैं।
इस प्रकार किसी कंपनी या व्यक्ति के किसी प्रोजेक्ट या कार्य में सफलता का अनुमान लगाने के लिए एक तकनिकी इस्तेमाल होती है जिसे हम स्वाॅट(SWOT) एनालिसिस कहते है।
SWOT अंग्रेजी के चार शब्दों के प्रथमाक्षरों (initial letters) से मिल कर बना है। ये शब्द हैं
Strength(शक्ति)
Weakness(कमजोरी)
Opportunities(मौके)
Threats(खतरे)
Weakness(कमजोरी)
Opportunities(मौके)
Threats(खतरे)
SWOT Analysis के द्वारा हम किसी भी कार्य के लिए हमारी strengths और weaknesses क्या है। तथा हमारे सामने क्या opportunities तथा क्या threats (खतरे) हो सकते हैं इन सबका एनालिसिस करते हैं।
इस प्रकार स्वाॅट एनालिसिस के द्वारा हम जान सकते हैं की किसी कार्य या बिज़नस के सफल होने की संभावनाएं हैं। और इसके लिए हमें क्या स्ट्रेटेजीज अपनानी होंगी।
अब आप जान गए कि स्वाॅट एनालिसिस के क्या फायदे हैं तो आइये अब जानते हैं कि स्वाॅट एनालिसिस किया कैसे जाता है?
स्वाॅट एनालिसिस किया कैसे जाता है? How SWOT Analysis Is Done?
स्वाॅट एनालिसिस करने के लिए सबसे पहले हमारे पास कोई प्रोजेक्ट, बिज़नस या बिज़नस आईडिया या कोई कार्य होना चाहिए जो आप या आपकी कंपनी करती है या शुरू करना चाहती है।
अब इस कार्य को सफलता पूर्वक पूरा करने के लये दो निकाय हैं एक है आप आपकी टीम या कंपनी जिसकी strength या weakness आपको जानना है और दूसरा है आपका वातावरण (environment) यानि आपका देश, प्रान्त, शहर, नियम-कानून, आपके competitors अदि जिनके द्वारा आपको मौके या खतरे हो सकते हैं।
जब आप स्वाॅट एनालिसिस करें तो आपको अपने आप को पहचानना आना चाहिए या आप अपने किसी परिचित मित्रों का भी सहयोग ले सकते हैं जो आपको आपको और आपकी कमजोरियों और ताकतों को शायद आपसे भी अच्छी तरह जानते हों। इसी प्रकार अपने वातावरण द्वारा उपलब्ध मौके और खतरे जानने के लिए आप एक्सपर्ट्स की सलाह भी ले सकते हैं।
अब आप अपने उद्देश्य के हिसाब से अपनी शक्तियों, कमजोरियों, मौकों और खतरों को लिख लीजिये। इसको आप निम्न टेबल से भी समझ सकते हैं।
उद्देश्य प्राप्ति में सहायक | उद्देश्य प्राप्ति में बाधक | |
|---|---|---|
आंतरिक उत्पत्तिआपके गुण | Sशक्ति | Wकमजोरी |
वाह्य उत्पत्तिवातावरण के गुण | Oमौके | Tखतरे |
स्वाॅट एनालिसिस का एक उदहारण Example Of SWOT Analysis
मित्रों ग्रामीण क्षेत्र के मार्केट में कपड़ों की एक पुरानी दुकान है जो काफी चलती है जिसे मनोज नाम का दुकानदार चलता है। पर पिछले एक साल में वहाँ पर कपड़ों की दो नयी दुकानें खुल गयी हैं। शुरू में मनोज ने सोचा कि ये नयी दुकाने ज्यादा नहीं चलेंगी पर हाल ही में उन्हें पता चला है की नए दुकानदार भी लगभग उनके जितना ही प्रॉफिट कमा रहे हैं।
अब ऐसी परिस्थितियों में मनोज के लिए ये जानना जरूरी हो जाता है कि इन नयी दुकानों से उनके बिज़नस पर क्या असर होगा? और वे ऐसा क्या कर सकता हैं जो उनकी कमाई को कम होने से बचा सके।
इसके लिए मनोज ने SWOT एनालिसिस किया और अपनी शक्ति, कमजोरी, मौके और खतरों को इस प्रकार लिखा
शक्तियां(Strengths)-
1. हम पुराने हैं इसलिए हमारी ग्राहकी बंधी हुयी है और आस-पास के सभी गाँवों से लोग हमारे यहाँ आते हैं।
2. हमरा व्यवहार सही है और हमारे यहाँ आने वाले लोगों को हम जानते पहचानते हैं इसलिए वे हमारे यहाँ से ही कपड़े खरीदते हैं।
3. हम अन्य लोगों की तुलना में कपड़े सस्ते में बेचते हैं, क्योंकि हम कई शहरों से माल मंगाते हैं।
4. हम कपड़े उधार में भी देते हैं, इसलिए हमारे यहाँ से बहुर दूर-दूर के लोग फाइनेंसियल स्ट्रेस के समय जैसे शादी आदि में कपड़े ले जाते हैं।
कमजोरीयां(Weaknesses)-
1. सस्ते कपड़े बेचने की वजह से हमारे यहाँ लोग सस्ते कपड़े ही ज्यादा खरीदते हैं जिसमें हमें कम मार्जिन मिलता है। और अधिक मार्जिन वाले महंगे कपड़े हमारे यहाँ से कम बिकते हैं।
2. उधर देने की वजह से हर साल लगभग 1 से 2 लाख रुपयों की रिकवरी नहीं हो पाती और हमारा प्रॉफिट काम होता है।
3. उधार न चुकाने वाले लोग हम उधार वापस न मांग लें इस डर से अक्सर हमरी दुकान पर आना बंद कर देते हैं, जिससे बिक्री में कमी आती है।
मौके(Opportunities)-
1. आस पास के दुकानदार कपड़े हमारे यहाँ से महंगे बेचते हैं। इसलिए हम भी अपने यहाँ प्राइस बढ़ाकर अपना प्रॉफिट बढ़ा सकते हैं।
खतरे(Threats)-
1. हमारे ही मार्केट में दो नयी दुकानें खुल गयीं हैं, जिन्होंने सीसे के दरवाजे लगाये हैं और उनके दुकान के सामने कपड़ों का डिस्प्ले अच्छा लगता है जिससे लोग खासकर ज्यादा पैसे खर्च करने वाले और शहरों में कमाने वाले उन दुकानों की ओर आकर्षित होते हैं।
2. नयी दुकानों में AC लगा है जिससे गर्मियों में जो ग्राहक उनके यहाँ बैठ जाता है महंगा ही सही वहाँ से ही कपड़े ले लेता है।
इस प्रकार दोस्तों अपनी दुकान के स्वाॅट एनालिसिस से मनोज को अपनी स्थिति का सही सही अंदाजा हो गया। और अब वो अपना लाभ बढ़ाने के लिए कई निर्णय ले सकता है जैसे सीसे और AC लगवाना, कीमतें बढ़ाना, उधार बंद करना आदि।
स्वाॅट एनालिसिस करते समय सावधानियाँ Precautions During SWOT Analysis
मित्रों स्वाॅट एनालिसिस एक टूल है और किसी भी अन्य टूल की ही तरह इसका इस्तेमाल और उपयोगिता भी इस टूल का प्रयोग करने वाले की दक्षता पर निर्भर करता है। हर एक टूल की कुछ सीमायें होती हैं और इअसका इस्तेमाल करने वालों को इन सीमाओं का ज्ञान होना आवश्यक होता है।
स्वाॅट एनालिसिस कोई मैजिक बुलेट नहीं है कि इसका इस्तेमाल करते ही आपके बिज़नस या कार्य की सारी समस्याएं दूर हो जाएँगी। लेकिन ये आपको सोचने को मजबूर करता है और आपको निर्णय लेने में सहायता करता हैं।
SWOT Analysis के कुछ limitations मैं आपको बताता हूँ
1. स्वाॅट एनालिसिस में आपकी strengths, weaknesses और आपके environment द्वारा उत्पन्न opportunities और threats की जानकारी आपको स्वयं जुटानी पड़ती है, जो आपके नॉलेज और experience पर निर्भर करता है। इसमें कुछ चीजें काफी मुश्किल हो सकती हैं जैसे अपने competitors की जानकारी।
2. इसमें कई बार लोग सिर्फ लिखने के लिए बहुत से पॉइंट लिख देते हैं जिनकी संभावना या impact अधिक नहीं होता। इसलिए इन पॉइंट्स को लिखने के बाद इनको इनके महत्व के आधार पर sort कर लेना चाहिए।
निष्कर्ष Conclusion
इस प्रकार आपने SWOT एनालिसिस के बारे में जाना। अब अगर आपके पास भी कोई काम, बिज़नस, नौकरी या प्रोजेक्ट है तो तुरंत कीजिये SWOT एनालिसिस और अपनी सफलता की संभावनाओं को सुनिश्चित कीजिये। एक बात और कोई भी नयी चीज सीखकर उसका प्रयोग करने की दक्षता आने में प्रैक्टिस और समय लगता है। इसलिए आप SWOT एनालिसिस अभी से शुरू कर दीजिये ताकि आप इसमें जल्द से जल्द एक्सपर्ट बन जायें और कौन कितने पानी में है ये जान सकें।
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31/7/16
फेसबुक के आप पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव Bad Effects Of Facebook
आज का युग internet का युग है और internet के इस युग में दुनिया के सबसे बड़े social media यानि फेसबुक का बोलबाला है। आज कोई व्यक्ति जब internet इस्तेमाल करना शुरू करता है तो ब्राउज़र का इस्तेमाल करना भले ही ना सीखे पर फेसबुक का profile पहले बनाता है। यहाँ तक कि अगर कोई खुद profile नहीं बना सकता तो वो दूसरों से अपना profile बनवाता है।
फेसबुक हमारे लिए काफी उपयोगी है, इसके द्वारा मित्र-रिश्तेदारों से कम्यूनिकेट करना बहुत ही आसान हो जाता है।
मैं पहले भी लिख चुका हूँ कि फेसबुक के लिए उसके users यानि आप उसके उत्पाद हैं। आप जो भी एक्टिविटी फेसबुक पर करते हैं वो सब लाॅग होती रहती है और फेसबुक इनका प्रयोग आपको समझने और आपके भविष्य की एक्टिविटीज जानने के लिए करता है। तथा इसी जानकारी की मदद से वो प्रचारकों को लुभाता है।
फेसबुक के प्रयोग से आपको बहुत से नुकसान भी होते हैं, जिनसे हमें हमेशा सावधान रहना चाहिए। अब किसी भी खतरे से निबटने के लिए पहले हमें उन खतरों को पहचानना पड़ता है। इसलिए पहले यहाँ दिए गए फेसबुक के बुरे प्रभावों को जानिये और देखिये आप पर कौन से बुरे प्रभावों का असर हो रहा है। उसके बाद उन बुरे प्रभावों निपटने के उपाय कीजिये।
फेसबुक का इस्तेमाल अगर आप प्रतिदिन 10 मिनट भी करते हैं तो भी आपको इसमे से कुछ नुकसान जैसे डिप्रेशन आदि हो सकते हैं।
जरूर पढ़ें फेसबुक इतने पैसे कैसे कमाता है? How Does Facebook Earns So Much Money?
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फेसबुक हमारे लिए काफी उपयोगी है, इसके द्वारा मित्र-रिश्तेदारों से कम्यूनिकेट करना बहुत ही आसान हो जाता है।
मैं पहले भी लिख चुका हूँ कि फेसबुक के लिए उसके users यानि आप उसके उत्पाद हैं। आप जो भी एक्टिविटी फेसबुक पर करते हैं वो सब लाॅग होती रहती है और फेसबुक इनका प्रयोग आपको समझने और आपके भविष्य की एक्टिविटीज जानने के लिए करता है। तथा इसी जानकारी की मदद से वो प्रचारकों को लुभाता है।
फेसबुक के प्रयोग से आपको बहुत से नुकसान भी होते हैं, जिनसे हमें हमेशा सावधान रहना चाहिए। अब किसी भी खतरे से निबटने के लिए पहले हमें उन खतरों को पहचानना पड़ता है। इसलिए पहले यहाँ दिए गए फेसबुक के बुरे प्रभावों को जानिये और देखिये आप पर कौन से बुरे प्रभावों का असर हो रहा है। उसके बाद उन बुरे प्रभावों निपटने के उपाय कीजिये।
- फेसबुक समय व्यर्थ करता है– मित्रों संस्कृत में एक श्लोक है “अति सर्वत्र वर्जयेते” यानि अति किसी भी काम में नहीं करनी चाहिए। लेकिन बहुत से लोग अपना बहुत सा कीमती समय फेसबुक पर बिताते हैं जिससे उनके अन्य जरूरी काम पूरे नहीं हो पाते। खासकर स्टूडेंट्स के ऊपर तो फेसबुक का बहुत असर पड़ता है और इसके ज्यादा इस्तेमाल से उनकी पढाई पर बुरा असर होता है। लोग मिनट-मिनट में फेसबुक चेक करते हैं और अपना समय बर्बाद करते हैं।
- Facebook आपको डिप्रेश करता है– जी हाँ मित्रों फेसबुक और फेसबुक friends आपके सामने ऐसा माहौल बना देते हैं जिससे आपको डिप्रेशन हो सकता है। फेसबुक पर लोग हमेशा अपनी achievements को ही share करते हैं।अब अगर आपके फेसबुक पर सैकड़ों friends हैं तो रोज कोई न कोई friend अपनी कुछ न कुछ achievement जैसे कोई नयी purchase या कोई tour या कोई event की फोटो या स्टेटस share करता है। इसकी वजह से आपको ऐसा लगता है जैसे हर कोई आपसे काफी अधिक खुश और अच्छी स्थिति में है।
पर असल में भी ऐसा ही हो ये जरूरी नहीं। क्योकि जब लोग समस्याओं से जूझ रहे होते हैं या फिर उनके साथ कुछ बुरा होता है तो अक्सर वो ये बातें फेसबुक पर पोस्ट नहीं करते। इससे फेसबुक पर एक प्रकार का bias पैदा हो जाता है जहाँ हर कोई खुश नजर आता है। और जब आप अपनी असली जिंदगी की तुलना फेसबुक पर उपलब्ध इन ख़ुशी भरी posts से करते हैं तो आपको लगता है कि आप अन्य लोगों की तुलना में ग़रीब, दुखी हैं और आपके जीवन में कुछ exiting नहीं हो रहा है।
इन बातों से आप समझ गए होंगे कि फेसबुक किस प्रकार ऐसा माहौल बनता है जो आपको डिप्रेशन में ले जा सकता है। - फेसबुक पर चीटिंग और फ्रॉड का खतरा रहता है– फेसबुक internet के माध्यम से चलता है जहाँ पर हर एक व्यक्ति की असलियत को verify करना संभव नहीं है। ऐसे में हम उनके द्वारा दी गयी जानकारी को ही सही मानकर चलते हैं इससे ऐसे लोगों पर भरोसा करना हमें काफी भरी पड़ सकता है।
हालांकि फेसबुक की टर्म्स एंड पॉलिसीस में अपने बारे में गलत जानकारी देना allowed नहीं है पर इसको फेसबुक verify नहीं कर सकता।ऐसी स्थिति में फेसबुक पर फ्रॉड की खबरें अक्सर अखबारों में आती रहती हैं। इसके अलावा फेसबुक पर share की गयी जानकारियों की सत्यता प्रमाणित करना भी मुश्किल होता है और इसी का फायदा उठाकर कुछ लोग फेसबुक पर झूठ फैलाते रहते हैं। - फेसबुक से छात्रों का रिजल्ट खराब होता है– फेसबुक के अधिक इस्तेमाल से छात्रों की पढाई पर बुरा असर होता है। खासकर फेसबुक notifications और messenger पर chat रिक्वेस्ट से पढ़ाई बहुत डिस्टर्ब होती है और उनका रिजल्ट खराब हो जाता है।
- फेसबुक से आपका स्वास्थ्य खराब होता है– फेसबुक का अधिक इस्तेमाल करने वाले दिन भर अपने मोबाइल या ल[पटप से चिपके रहते हैं जिससे उनकी physical एक्टिविटीज कम हो जाती हा जो आपके हेल्थ के लिए अच्छा नहीं है।
- फेसबुक का अधिक इस्तेमाल करने वालों को मौत का भी खतरा रहता है– जो लोग फेसबुक पर अजीब अजीब और खतरनाक जगहों की selfie पोस्ट करते रहते हैं उनकी इन खतरनाक जगहों पर selfie लेने के चक्कर में जान जाने का भी खतरा बना रहता है। selfie डेथ की ख़बरें आए दिन अखबारों में छपती रहती हैं।
- फेसबुक आपको internet से अलग कर देता है– जी हाँ फेसबुक भले ही internet पर ही चलता है पर इसके features आपको internet का इस्तेमाल ना कर फेसबुक पर ही रहने के लिए बाध्य कर देते हैं जिससे आप internet पर अन्य एक्टिविटीज करने के बजाय फेसबुक तक ही सिमित रह जाते हैं। और फेसबुक में जो share हुआ, जो न्यूज़ आयी, जो विडियो आया वही देखकर जानकारी जुटाते हैं। इस प्रकार आप internet के इस्तेमाल का पूरा फायदा नहीं उठा पाते।
- Facebook आपकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर सकता है– कुछ समय पहले फेसबुक ने एक experiment किया था जब उन्होंने लोगों के फेसबुक फीड में आने वाले posts को फ़िल्टर किया। यानी किसी को सिर्फ अच्छी खबरों वाले posts दिखाए और किसी को सिर्फ बुरी खबरों वाले posts। इसके बाद इन लोगों पर होने वाले प्रभाव को देखा गया। इस प्रयोग से यह स्पष्ट हो गया की फेसबुक पर जिस प्रकार की posts ज्यादा आती हैं लोगों का मूड भी वैसा ही हो जाता है।
मतलब फेसबुक हमारी भावनाओं को बदल सकता है। यह स्थिति किसी भी समाज के लिए ठीक नहीं होती। क्योंकि यह फेसबुक को एक ऐसी शक्ति दे देती है जो लोगों का काफी नुक्सान कर सकती है। इसलिए फेसबुक का प्रयोग देश के दुश्मन प्रोपेगैंडा फ़ैलाने के लिए भी कर सकते हैं।
आप थोड़ा ध्यान से देखेंगे तो आप को समझ में आयेगा की यह प्रोपेगैंडा वार फेसबुक पर चल रहा है और इस के लिए लोग आपस में भी लड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं।
लोगों को लगता है की वे समाज के लिए कुछ अच्छा कर रहे हैं लेकिन दरअसल लोग इस प्रोपेगैंडा वार के मोहरे बन कर रह जाते हैं। - False sense of activism– फेसबुक पर अक्सर लोग समाज में फैली कुरीतियों को लेकर काफी अच्छे कमेन्ट करते हैं और किन्ही घटनाओं के समर्थन या विरोध में अपना dp चेंज करते हैं। इससे उन्हें लगता है की वो समाज में कोई पॉजिटिव चेंज लाने वाले हैं। पर कुछ मामलों को छोड़कर जायदातर आपके इन कमेंट्स या dp चेंज करने से कोई फर्क नहीं पड़ता। सिर्फ आपका और आपके अपनों का समय बर्बाद होता है। इस तरह से समाज सुधारक बनाने के चक्कर में लोग अक्सर प्रोपेगैंडा वार के मुहरे बन कर रह जाते हैं।
- फेसबुक offices में employees की productivity को कम कर देता है– फेसबुक जब शुरू में आया था तो स्मार्ट फोन नहीं थे और मोबाइल internet का भी प्रचालन बहुत काम था। जब आप फेसबुक यूज़ करना चाहते थे तो आपको डेस्कटॉप या लैपटॉप पर बैठ कर इसे उसे करना पड़ता था।इस वजह से कम्पनियाँ ऑफिस टाइम में आपके फेसबुक के प्रयोग को बंद या सिमित कर सकती थीं।
पर आज स्मार्ट फोन और मोबाइल internet के जमाने में यह काम असंभव सा हो गया है। आज लोग ऑफिस में भी अपने मोबाइल पर फेसबुक का इस्तेमाल करते रहते हैं इससे उनका काम का समय बर्बाद होता है और उनकी प्रोडक्टिविटी कम हो जाती है।
फेसबुक का इस्तेमाल अगर आप प्रतिदिन 10 मिनट भी करते हैं तो भी आपको इसमे से कुछ नुकसान जैसे डिप्रेशन आदि हो सकते हैं।
जरूर पढ़ें फेसबुक इतने पैसे कैसे कमाता है? How Does Facebook Earns So Much Money?
दोस्तों फेसबुक के आप पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव इस विषय पर मेरी यह post कैसी लगी? कमेंट या ईमेल के द्वारा हमें बता सकते हैं। हमारा ईमेल पता है safalbharat.com@gmail.com ।
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